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चाकुलिया : जल स्रोतों से लेकर गांव तक कूमे तैयार, मकर संक्रांति का इंतजार

Chakulia : ताड़ और खजूर के पत्तों को काटने और सुखाने का काम पूरा हो गया है. विभिन्न जल स्रोतों से गांव तक ताड़ और खजूर के पत्तों के कूमे बनकर तैयार हो गए हैं. ग्रामीणों को 15 जनवरी को मकर संक्रांति का इंतजार है. ग्रामीण इलाका अब धीरे-धीरे मकर पर्व के रंग में रंगने लगा है. हालांकि टुसू गीत के बोल सुनाई नहीं पड़ रहे हैं. अलबत्ता विभिन्न हाथों में टुसू की प्रतिमाएं बिकने लगी हैं. फिर भी लोग अपने अपने तरीके से पर्व की तैयारी में जुटे हैं. इसे भी पढ़ें :चाईबासा">https://lagatar.in/chaibasa-kolhan-universitys-non-teaching-staff-is-not-getting-seventh-pay-scale-employees-upset/">चाईबासा

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स्वर्णरेखा नदी तट पर 20 फीट तक ऊंचे कूमे बनाए गए हैं

अन्य राज्यों में रोजगार की तलाश में गए लोग अब अपने गांव लौटने लगे हैं. मकर के दिन सुबह में स्नान कर आग तापने के के लिए सूखे पत्तों से विभिन्न जल स्रोतों के पास कूमा बनाने का काम पूरा हो गया है. एक माह पहले से ही लोगों ने ताड़ और खजूर के पत्तों की कटाई शुरू कर दी थी. विभिन्न गांव में तालाब और छोटी नदियों से लेकर गांव तक कूमे बन गए हैं. स्वर्णरेखा नदी के किनारे तो 20 फीट तक ऊंचे कूमे बनाए गए हैं. मकर के दिन स्नान करने के बाद लोग इन कूमों में आग लगाकर आग तापते हुए घर आते हैं. ग्रामीण पीठा और पकवान की तैयारी में जुट गए हैं. नए वस्त्र खरीदने का सिलसिला शुरू हो गया है. जो ग्रामीण परदेस में कुछ कमा कर लौटे हैं, उनमें खासा उत्साह देखा जा रहा है. गांवों में मकर मेला की तैयारी शुरू हो गई है. इसे भी पढ़ें :जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-results-of-various-cultural-competitions-organized-by-mataji-ashram-hata-announced/">जमशेदपुर

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