Chakulia : साइलेंट डॉक्टर कहे जाने वाले औषधीय गुणों से भरपूर सेमल के पेड़ अब अवैध कटाई से विलुप्त से होते जा रहे हैं. इन दिनों सेमल के पेड़ों पर लाल रंग का फूल निकलने का मौसम है. परंतु चाकुलिया वन क्षेत्र में इक्के दुक्के सेमल के पेड़ ही नजर आ रहे हैं. सेमल के पेड़ ग्रामीणों की आर्थिक आय के साधन भी हैं. सेमल के फूल, छाल, पत्ते, फल और जड़ में औषधीय गुण होते हैं जो कई रोगों में फायदेमंद होते हैं. सेमल की रूई वाला तकिया सिर और गर्दन के दर्द से जुड़ी बीमारियों में फायदेमंद होता है. सेमल का पौधा फास्ट ग्रोइंग पौधा की श्रेणी में आता है. सेमल पेड़ों की संख्या काफी कम होने के कारण ही आज बाजार में सेमल की रूई दुर्लभ हो गई है.
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एक समय था जब चाकुलिया वन क्षेत्र में सुवर्णरेखा नदी समेत अन्य छोटी नदियों और जंगलों में सेमल के वृक्ष बहुतायत पाए जाते थे. नदियों के तट पर होने के कारण सेमल के पेड़ बाढ़ से मिट्टी का कटाव रोकने में भी सहायक होते थे. सेमल का पेड़ गरीबों और खासकर विलुप्त होती आदिम जनजाति सबरों की आय का जरिया था. वे इसकी रूई को बेचकर आय प्राप्त करते थे. सेमल की लकड़ी से नाव भी बनाई जाती है. परंतु, अवैध कटाई के कारण सेमल के पेड़ नदियों के किनारे और जंगलों से गायब हो गए हैं. कहीं-कहीं पर एक दो पेड़ जरूर नजर आते हैं. इसकी लकड़ी से नाव बनायी जाती है और प्लाईवुड में भी प्रयोग होता है.
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सेमल के पेड़ औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं. इसके फूल ल्यूकोरिया बीमारी में फायदेमंद होते हैं. इसकी छाल और पत्ते पेचिश, ट्यूमर, कब्ज, कमर दर्द, खांसी, घाव को ठीक करने और दूध बढ़ाने में कारगर हैं. चेहरे पर कील और मुहांसों को दूर करने में भी इसके छाल और पत्ते औषधी का काम करते हैं. इसलिए सेमल के पेड़ को साइलेंट डॉक्टर कहा जाता है. वन विभाग वन रोपण के वन क्षेत्र पदाधिकारी बिमद कुमार ने इस मसले पर बताया कि वन विभाग द्वारा अन्य प्रजाति के पौधों के रोपण के साथ सेमल के पौधों का रोपण भी किया जा रहा है. पौधों की रक्षा करने की दिशा में भी विभाग तत्पर है. [wpse_comments_template]
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