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चाकुलिया : वन विभाग है संसाधन विहीन, गर्मी में आग से कैसे बचेंगे काजू के जंगल?

Chakulia : काजू के उत्पादन के लिए मशहूर चाकुलिया वन क्षेत्र में फूलों और फलों के मौसम में काजू जंगलों को बचाना वन विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती है. क्योंकि गर्मी की दस्तक से ही काजू जंगलों में आग लगने का सिलसिला शुरू हो जाता है और फूलों तथा फलों से लदे काजू के पेड़ झुलस जाते हैं. अभी गर्मी ने दस्तक नहीं दी है. मगर काजू जंगलों में आग लगने का सिलसिला शुरू हो गया है. संसाधनों के अभाव में तथा जंगलों में फायर लाइन का निर्माण नहीं होने के कारण वन विभाग जंगल में लगी आग को काबू पाने में असफल हो जाता है. इसे भी पढ़ें :किरीबुरू">https://lagatar.in/kiriburu-former-minister-assures-help-for-construction-of-crematorium/">किरीबुरू

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आग से फूलों से लदे काजू के वृक्ष झुलस जाते हैं 

ज्ञात इस वन क्षेत्र में लगभग 3000 हेक्टेयर वन भूमि और लगभग 1000 हेक्टेयर रैयत भूमि पर काजू के वृक्ष हैं. प्रतिवर्ष करोड़ों रुपए के काजू का उत्पादन होता है. फिलहाल काजू के वृक्ष फूलों से लदने लगे हैं. मार्च और अप्रैल में काजू बीज का संग्रह वन सुरक्षा समितियों द्वारा होना शुरू हो जाता है. गर्मी के साथ ही जंगलों में आग लगने का सिलसिला शुरू हो जाता है. आग से फूलों से लदे काजू के वृक्ष झुलस जाते हैं और काजू का उत्पादन नहीं होता है. ऐसे में काजू के जंगलों को आग से रक्षा करना वन विभाग और वन सुरक्षा समितियों के लिए एक बड़ी चुनौती है. इसे भी पढ़ें :जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-news-paper-distributors-association-did-vanbhoj/">जमशेदपुर

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फायर लाइन निर्माण के लिए प्रस्ताव भेजा गया है

विदित हो कि काजू के जंगल में पत्तों और झाड़ियों की भरमार है. गर्मी में पत्ते और झाड़ियां सूख जाती हैं. ऐसे में अगर जंगल में आग लगती है तो यह आग बहुत ही तेजी से फैलती है और पूरे जंगल को अपनी आगोश में ले लेती है. इस आग से जंगल के छोटे-मोटे वन्य प्राणी तो मर ही जाते हैं फूलों तथा फलों से लदे काजू के वृक्ष भी जल जाते हैं और झुलस जाते हैं. जिन काजू जंगलों में आग लगती है, उस जंगल के काजू वृक्षों से काजू का उत्पादन नहीं होता है. चूंकी वृक्ष बहुत बड़े नहीं होते हैं. इसलिए जंगल की आग इन्हें सहज ही अपनी चपेट में ले लेती है. काजू वृक्षों के रखरखाव पर वन विभाग और सरकार की कोई योजना नहीं है. वनों की सुरक्षा का जिम्मा वन सुरक्षा समितियों को दिया गया है. चाकुलिया वन क्षेत्र में हर साल आग से काजू वनों को भारी नुकसान होता है. अब गर्मी दस्तक देने वाली है और ऐसे में काजू वनों समेत अन्य वनों की सुरक्षा वन विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती है. इस मसले पर चाकुलिया के वन क्षेत्र पदाधिकारी दिग्विजय सिंह ने बताया कि काजू वनों की सुरक्षा के लिए वन विभाग के कर्मचारी और वन सुरक्षा समितियों के सदस्य तत्पर रहते हैं. उन्होंने बताया कि जंगल में लगने वाली आग पर काबू पाने के लिए उन्होंने फायर लाइन निर्माण के लिए प्रस्ताव भेजा है. परंतु अभी तक स्वीकृति नहीं मिली है. इसे भी पढ़ें :जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-cat-sent-18-point-budget-demand-letter-to-finance-minister/">जमशेदपुर

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