Ranchi : फेडरेशन ऑफ झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज (एफजेसीसीआई) की एजुकेशन उप समिति की बैठक शनिवार को आयोजित हुई. बैठक में बीआईटी मेसरा द्वारा इस शैक्षणिक सत्र से झारखंड के छात्रों के लिए लागू 50 प्रतिशत होम स्टेट कोटा समाप्त कर सभी सीटों पर ऑल इंडिया मेरिट के आधार पर नामांकन लेने के निर्णय पर विस्तार से चर्चा की गई.
बैठक में उप समिति के चेयरमैन ने कहा कि बीआईटी मेसरा का यह निर्णय झारखंड के विद्यार्थियों के लिए गंभीर चिंता का विषय है. उन्होंने कहा कि अब तक होम स्टेट कोटा के तहत लगभग 650 सीटें राज्य के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध रहती थीं, जिससे झारखंड के मेधावी छात्रों को देश के प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों में से एक बीआईटी मेसरा में अध्ययन का अवसर मिलता था.
उन्होंने कहा कि ऑल इंडिया कोटा और होम स्टेट कोटा के कट-ऑफ में उल्लेखनीय अंतर होने के कारण राज्य के अनेक छात्र-छात्राओं को लाभ मिलता रहा है. इस व्यवस्था के समाप्त होने से अब झारखंड के विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धा के बीच प्रवेश प्राप्त करना होगा, जिससे विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर और निम्नवर्गीय परिवारों के छात्रों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है.
बैठक में यह भी कहा गया कि राज्य के अधिक छात्रों का स्थानीय संस्थानों में नामांकन होने से झारखंड की तकनीकी शिक्षा और मानव संसाधन विकास को भी बढ़ावा मिलता रहा है. ऐसे में होम स्टेट कोटा समाप्त होने का असर राज्य की शैक्षणिक प्रगति पर भी पड़ सकता है.
उपस्थित सदस्यों ने इस निर्णय पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इसे झारखंड के छात्रों के हितों के विपरीत बताया. बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि इस मुद्दे के समाधान के लिए एफजेसीसीआई का एक प्रतिनिधिमंडल राज्य के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री और विभागीय सचिव से मुलाकात करेगा और राज्य सरकार और बीआईटी मेसरा के बीच आवश्यक पहल सुनिश्चित करने का आग्रह करेगा, ताकि झारखंड के विद्यार्थियों के लिए होम स्टेट कोटा व्यवस्था को पुनः बहाल किया जा सके.
बैठक में एफजेसीसीआई के उपाध्यक्ष प्रवीण लोहिया, राम बांगड़, कार्यकारिणी सदस्य मुकेश अग्रवाल, उप समिति चेयरमैन पारस अग्रवाल, सदस्य आलोक सिंह सहित कई अन्य सदस्य उपस्थित थे.
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