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चैंबर ऑफ कॉमर्स का सरकार को सुझाव, कैसे रेगुलर होंगे सीएनटी का उल्लंघन कर बने 75 फीसदी भवन

  • अवैध भवनों को नियमित करने की योजना पर 10 अप्रैल को स्टेक होल्डर्स की बैठक
  • नगर विकास विभाग करेगा स्टेक होल्डर्स के सुझावों और दूसरे राज्यों की नीतियों की समीक्षा
  • चैंबर ने सरकार को दिया सुझाव- सिंगल विंडो सिस्टम से योजना को लागू की जाये
  • बिल्डिंग रेगुलराइज करने के लिए मिनिमम लैंड पेपर्स
  • बिजली, पानी का बिल और भवन निर्माता का अंडरटेकिंग लेकर किया जाये भवन नियमित
  • योजना को लैंड यूज के प्रावधानों से मुक्त रखा जाये
  • 15 मीटर से ज्यादा उंचे और 500 स्क्वायर मीटर से ज्यादा एरिया वाले भवन भी हों रेगुलर
  • गलत डिक्लियरेशन पर नक्शा खारिज, जुर्माना और दंड का हो प्रावधान
Satya Sharan Mishra Ranchi : झारखंड में 31 दिसंबर 2019 से पहले बने अवैध भवनों को रेगुलर करने के लिए बने ड्राफ्ट पर 100 से अधिक स्टेक होल्डर्स ने आपत्तियां और सुझाव दिये हैं. ड्राफ्ट पर आये सुझावों की 10 अप्रैल को समीक्षा होगी. जिसमें झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स, क्रेडाई, बिल्डिंग और आर्किटेक्ट एसोसिएशन के सदस्य शामिल होंगे. नगर विकास विभाग के चीफ टाउन प्लानर गजानंद राम के मुताबिक, बैठक में विभिन्न संगठनों से आये सुझावों की समीक्षा होगी और राय ली जायेगी. दूसरे राज्यों के भवन नियमितिकरण योजना से तुलना के बाद एक फाइनल ड्राफ्ट तैयार किया जायेगा. सरकार से अप्रूवल मिलने के बाद यह लागू होगा. उधर चैंबर ऑफ कॉमर्स ने शहरों में सीएनटी एक्ट का उल्लंघन कर बने 75 फीसदी भवनों को नियमित करने के लिए बीच का रास्ता सुझाया है. साथ ही सिंगल विंडो सिस्टम से इस योजना को लागू करने का सुझाव भी दिया है. (पढ़ें, सीआईडी">https://lagatar.in/cid-arrested-four-cyber-criminals-used-to-cheat-by-making-fake-apps/">सीआईडी

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2012 के बाद खरीदी गयी जमीनों में सबसे ज्यादा परेशानी

चैंबर ऑफ कॉमर्स ने नगर विकास विभाग को भेजे अपने सुझाव कहा है कि 2012 में 51 पिछड़ी जाति को सीएनटी एक्ट में शामिल किया गया था. शहरी निकायों में काफी जमीन 2012 के बाद खरीदे गये थे. सीएनटी में आने के कारण इन जमीनों की न रसीद कटती है और न म्यूटेशन होता है. 75 फीसदी लोगों का नक्शा भूमि संबंधी मामले के कारण पास नहीं हुआ है. इसलिए बिल्डिंग रेगुलराइज के लिए मिनिमम लैंड पेपर्स लेने चाहिए. अगर व्यक्ति बिजली बिल या वाटर कनेक्शन में कोई एक दस्तावेज जमा करते हैं तो अंडरटेकिंग (अगर जमीन में कोई विवाद होगा तो नक्शा स्वत: रद्द हो जायेगा) के साथ बिल्डिंग को रेगुलर किया जा सकता है.  इसे भी पढ़ें : अडानी">https://lagatar.in/pawar-came-to-the-fore-in-adani-interview-case-then-said-jpc-will-be-dominated-by-the-ruling-party-t-truth-will-not-come-out/">अडानी

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चैंबर ने सरकार के ड्राफ्ट को माना है अधूरा

चैंबर ने सरकार द्वारा बनाये गये ड्राफ्ट को अधूरा माना है. कहा कि भवन नियमितिकरण योजना को लैंड यूज के प्रावधानों से मुक्त रखा जाना चाहिए. जिन भवनों की उंचाई 15 मीटर से अधिक और 500 स्क्वायर मीटर प्लिंथ एरिया से ज्यादा है, उसका भी शुल्क के साथ नियमितिकरण का प्रावधान किया जाना चाहिए. 15 मीटर से अधिक उंचे और 500 स्क्वायरमीटर से अधिक प्लिंथ एरिया वाले रेसिडेंशियल बिल्डिंग को नगर निगम क्षेत्र में 100, नगर परिषद में 75 और नगर पंयातर में 50 रुपये प्रति स्क्वायर मीटर की फीस लेकर रेगुलर किया जाना चाहिए. इसी तरह अगल-अलग उंचाई और प्लिंथ एरिया वाले मकानों के लिए चैंबर ने सरकार को सुझाव दिये हैं. चैंबर ने कहा है कि निगम के पदाधिकारी 15 मीटर से उंचे और 500 स्क्वायर मीटर प्लिंथ एरिया से अधिक के भवनों की जांच कर सकते हैं. अध्ययन कराकर इसे सेंक्शन करने का प्रोसेस किया जा सकता है, क्योंकि ऐसे भवनों की संख्या अधिकतम 10 फीसदी होगी.  इसे भी पढ़ें : गर्मी">https://lagatar.in/consume-these-fruits-in-summer-stay-healthy/">गर्मी

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सिंगल विंडो से एकमुश्त फीस लेकर दिया जाये अप्रूवल

चैंबर ने यह भी सुझाव दिया कि गलत सूचना (डिक्लियरेशन) दिये जाने पर नक्शा खारिज कर दिया जाना चाहिए. इसके अलावा दंड और कानून कार्रवाई का प्रावधान किया जाना चाहिए. इसके लिए नगर निकायों को 25 फीसदी नक्शों की रेंडमली जांच करने की जरूरत है. वहीं नियमितिकरण के पूरे फीस की राशि एकमुश्त जमा कर सिंगल विंडो से नक्शे को अप्रूवल दिया जा सकता है. इससे विभाग का 90 फीसदी समय बचेगा और लोगों को दफ्तर के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे. इसके साथ ही सरकार 31 दिसंबर 2019 के पहले के बने भवनों के बजाये नई अधिनियम की अधिसूचना जारी होने के दिन तक हुए भवन निर्माण पर इसे लागू करे. ओडिशा, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में ऐसा ही प्रावधान है. अविवादित भू-स्वामित्व से संबंधित एक शपथ पत्र आवेदन के साथ लेना चाहिए और यह प्रावधान करना चाहिए कि स्वामित्व में विवाद होने पर नक्शा स्वत खारिज समझा जायेगा. इसे भी पढ़ें : बोकारो,">https://lagatar.in/naxal-violence-in-bokaro-ramgarh-and-lohardaga-burnt-11-vehicles-engaged-in-construction-work/">बोकारो,

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चैंबर का प्रयास, हर आम आदमी को मिले राहत- आदित्य मल्होत्रा

झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स के उपाध्यक्ष आदित्य मल्होत्रा ने कहा कि सरकार का यह सकारात्मक कदम है. लेकिन इसका निष्पादन सीमित संसाधनों और सीमित अधिकारियों से समय सीमा में संभव नहीं है. अवैध निर्माण के नियमितिकरण योजना का क्रियान्वयन सिंगल विंडो सिस्टम से किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि चैंबर का प्रयास है कि हर आम आदमी को राहत मिले. चैंबर के सुझावों को मानते हुए नया ड्राफ्ट बनता है तो, उससे सरकार का गुडविल बढ़ेगा. लोगों के बीच अच्छा मैसेज जायेगा और राज्य के विकास को गति मिलेगी. इसे भी पढ़ें : गर्मी">https://lagatar.in/drinking-water-crisis-in-old-panki-as-soon-as-summer-comes-a-large-population-is-dependent-on-a-chapakal/">गर्मी

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