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चांडिल : प्राचीन सांस्कृतिक विरासत ही हमारी पहचान है : तरुण महतो

Chandil (Dilip Kumar) : चांडिल प्रखंड के दुर्गम क्षेत्र में बसे पियालडीह गांव में सरस्वती पूजा के उपलक्ष में विशाल सांस्कृतिक मेला आयोजित किया गया. मेला में आदिवासी पांता नाच, झुमूर संगीत कार्यक्रम में कलाकरों ने देर रात तक लोगों को आनंदित किया. बसंत पंचमी के उपलक्ष्य पर पियालडीह में विद्या की देवी मां सरस्वती की आकर्षक प्रतिमा स्थापित की गई है. यहां देवी की पूजा-अर्चना के साथ ही मेला का आयोजन किया गया है. मेला में दूर-दराज से बड़ी संख्या में लोग शामिल होकर आनंद मेला का उठाए. इस दौरान लोगों ने अपनी प्रचीन परंपरा को अक्षुण्ण बनाए रखने का भी संकल्प लिया. इसे भी पढ़ें : जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-grand-yajna-ritual-at-sidgora-suryadham-temple-from-february-21/">जमशेदपुर

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जरुरतमंदों के बीच बांटा कंबल

मेला में उपस्थित झारखंडी भाषा खतियानी संघर्ष समिति चांडिल अनुमंडल इकाई के सक्रिय सदस्य सह पियालडीह गांव निवासी तरुण महतो ने कहा कि भारतीय संस्कृति पूरी दुनिया में लोकप्रिय है. उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक विरासत का मतलब हमारी प्राचीन भारतीय संस्कृति सभ्यता और प्राचीन परंपराओं से है. हमारी भारतीय संस्कृति विश्व की एकमात्र ऐसी संस्कृति है जो लोक कल्याण व वसुधैव कुटुंबकम के सिद्धांत को आधार मानकर व्यक्ति एवं समाज का कल्याण करती है. हमारी प्राचीन संस्कृति काफी समृद्ध रहा है, इसे जीवित रखने का दायित्व युवा वर्ग को है. मौके पर तरुण महतो के माता व पिता ने पियालडीह व आसपास गांव के जरूरतमंदों के बीच कंबल का वितरण किया. [wpse_comments_template]

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