पंकज मिश्रा के ठिकानों पर और परेशान हो गये निशिकांत दुबे
फसलों के निरोग और निर्बाध पनपने की कामना
दरअसल, आषाढ़ी पूजा प्रकृति के प्रकोप से फसल को बचाने, स्वास्थ पौधा पनपने, अच्छी वर्षा होने, कीट-पतंगों से फसल की रक्षा करने, किसी प्रकार की अनहोनी से बचाने, अच्छी पैदावार होने और सभी की कुशलता की कामना करने के लिये की जाती है. इस दौरान माझी बाबा जाहेरथान में इष्ट देव से फसलों के निरोग और निर्बाध पनपने की कामना करते हैं. इस अवसर पर मुर्गा, भेड़ या बोदा यानि बकरे की बलि दी जाती है. मान्यता है कि आषाढ़ी पूजा नहीं करने वालों का कृषि कार्य बाधित होती है और उसपर विपत्ति आती है. इसलिए इस पर्व का आयोजन गांव-गांव में किया जाता है.इष्टदेव से ग्रामीणों की खुशहाली व अच्छी फसल की कामना
चांडिल प्रखंड के रायडीह के गुंगूकोचा में आषाढ़ी पूजा कर ग्रामीणों की खुशहाली के साथ अच्छी बारिश के साथ धान की पैदावार अच्छी होने की कामना की गई. माझी बाबा प्रफुल्ल मुर्मू और छोट बुधु पहाड़िया ने पारंपरिक रूप से पूजा-अर्चना की और खेत में बोये बीज की सलामती की मन्नत मांगी. मौके पर जाहेरथान में मुर्गा की बलि दी गई. इस दौरान लोगों ने सामूहिक रूप से पारंपरिक सोडे मांडी यानि खिचड़ी खाई. इस अवसर पर चानु पहाड़िया, गुरुवा पहाड़िया, फागु पहाड़िया, भानुलाल हांसदा, नरसिंह हांसदा, जयचांद तांती, हलधर हांसदा, किरण मुर्मू, तरणी मुर्मू, बुधराम हेंब्रम, धनंजय महतो, हरिपद मुर्मू, आंदो महतो, चुनाराम हांसदा समेत कई लोग उपस्थित थे. इसे भी पढ़ें: रांची:">https://lagatar.in/ranchi-chief-minister-should-take-strict-action-against-the-patrons-of-sand-loot-babulal-marandi/">रांची:बालू लूट के संरक्षकों पर कड़ी कार्रवाई करें मुख्यमंत्री- बाबूलाल मरांडी [wpse_comments_template]

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