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चांडिल : डोबो जमीन विवाद मामले में बलराम महतो के खिलाफ मामला दर्ज

Chandil ( Dilip Kumar) : चांडिल थाना क्षेत्र के डोबो जमीन विवाद मामले में अब नया मोड़ आ गया है. विधायक सविता महतो को जमीन पर कब्जा दिलाने गए अधिकारियों के समक्ष जमीन पर अपना हक जताने वालों के बीच हुए विवाद के दौरान जिस बलराम महतो का गला दबाते हुए अंचल अधिकारी का वीडियो वायरल हुआ था, उस बलराम महतो के खिलाफ चांडिल थाना में सरकारी काम में व्यवधान डालने का मामला दर्ज किया गया है. उसके साथ मनोज नाम के एक व्यक्ति और 20-25 अज्ञात के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है. इनके खिलाफ जमीन सीमांकन के लिए प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी चांडिल के अंचल निरीक्षक स्वपन कुमार मिश्रा ने घटना के एक दिन बाद 20 जुलाई को ही दर्ज कराया है. सीमांकन के लिए चांडिल के अंचल अधिकारी प्रणव अम्बष्ट को वरीय दंडाधिकारी के रूप में प्रतिनियुक्त किया गया था. इसे भी पढ़ें : चक्रधरपुर">https://lagatar.in/chakradharpur-three-women-injured-in-thunderstorm-in-galialor-village-of-hatnatodang-panchayat/">चक्रधरपुर

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बलराम का गला दबाने वाला वीडियो हुआ था वायरल

दरअसल, चांडिल के डोबो में विधायक सविता महतो और सर्वेश्वर सिंह सरदार के बीच करीब तीन एकड़ जमीन के मालिकाना हक को लेकर विवाद चल रहा है. उक्त जमीन पर दोनों अपना हक जता रहे हैं. इसी बीच 19 जुलाई को चांडिल अनुमंडल प्रशासन ने दंडाधिकारी व पुलिस बल तैनात कर जमीन का सीमांकन कराया. सीमांकन के साथ ही उक्त भूखंड पर चाहरदीवारी निर्माण का कार्य भी शुरू किया गया. इस दौरान वहां वरीय दंडाधिकारी के रूप में प्रतिनियुक्त अंचल अधिकारी प्रणव अम्बष्ट का एक व्यक्ति का गला दबाते हुए एक वीडियो वायरल हुआ था. प्रशासन की ओर से बताया गया कि उक्त व्यक्ति बलराम महतो नशे में धूत होकर अधिकारी व पुलिस बल के साथ दुर्व्यवहार कर रहा था. गला दबाने का वायरल वीडियो को भी झुठा बताया गया था.

रिकार्ड रूम से खतियान की प्रति गायब

जमीन पर अपना हक जताने वालों ने बताया कि चाईबासा के रिकार्ड रूम से खतियान की प्रति गायब कर दिया गया है. वे लोग खतियात की प्रति लेने चाईबासा गए थे, जहां रिकार्ड रूम में खतियान की छायाप्रति नहीं मिली. जमीन पर हक जताने वालों ने मामले पर उच्च स्तरीय जांच की मांग की है, ताकि वास्तविकता सामने आ सके. उक्त भूखंड पर रहने वालों ने कहा कि सरायकेला न्यायालय में जमीन का मामला विचाराधीन रहने के बावजूद स्थानीय प्रशासन की ओर से जल्दबाजी में बल पूर्वक जमीन पर कब्जा करना कई सवाल खड़ा कर रहा है. [wpse_comments_template]

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