Chandil (Dilip Kumar) : विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए भौतिक शिक्षा के साथ-साथ नैतिक शिक्षा की भी आवश्यकता है. नैतिक शिक्षा से ही चरित्र का निर्माण होता है. चरित्र निर्माण ही शिक्षा का मूल उद्देश्य है. भौतिक शिक्षा भौतिकता की ओर धकेल रही है. वर्तमान समय में बच्चों को संस्कारी बनाने के लिए भौतिक शिक्षा के साथ नैतिक शिक्षा की आवश्यकता है. उक्त बातें माउंट आबू राजस्थान से आए प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के राजयोगी ब्रह्माकुमार भगवान भाई ने कही. वे मंगलवार को चांडिल स्थित नौरंगराय सूर्यादेवी सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में जीवन में नैतिक शिक्षा के महत्त्व विषय पर बोल रहे थे. ब्रह्माकुमार भगवान भाई ने विद्यालय के सभी विद्यार्थी और शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान में बच्चों को अच्छे संस्कार की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि चरित्रवान और गुणवान बच्चे देश की सच्ची सम्पत्ति है. इसे भी पढ़ें : चाईबासा">https://lagatar.in/chaibasa-tata-college-wrote-a-letter-to-the-district-administration-get-the-grounds-cleaned-after-use/">चाईबासा
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alt="" width="600" height="400" /> कार्यक्रम में उपस्थित बच्चे.[/caption] नैतिक शिक्षा की धारणा व आंतरिक सशक्तीकरण से इच्छाओं को कम कर भौतिकवाद की आंधी से बचा जा सकता है. नैतिक शिक्षा से ही सदगुणों का विकास होता है. नैतिक शिक्षा बच्चों को संस्कारों से जोड़ती है. उन्हें उनके कर्तव्यों का ज्ञान कराती है. परिवार, समाज, समूह के नैतिक मूल्यों को स्वीकारना तथा सामाजिक रीति-रिवाजों, परंपराओं व धर्मों का पालन करना सिखाती है. मानगो के ब्रह्माकुमारी राजयोग सेवाकेंद्र की संचालिका बीके रूबी बहन ने कहा कि जिन बच्चों को बचपन से ही सच बोलना, सहयोग करना, दया करना, निष्पक्षता, आज्ञापालन, राष्ट्रीयता, समयबद्धता, सहिष्णुता, करुणा आदि मानवीय गुणों को सिखाते हैं, उन्हीं बच्चों में बाद में चलकर ये ही गुण पुष्पित, पल्लवित व विकसित होकर चरित्र निर्माण में सहायक होते है. स्थानीय ब्रह्माकुमारी सेवाकेंद्र की संचालिया बीके सुकन्या ने सभी को राजयोग सेवाकेंद्र पर आकर नैतिक शिक्षा सिखने के लिए आमंत्रित किया. इसे भी पढ़ें : धनबाद">https://lagatar.in/dhanbad-two-friends-clashed-over-the-issue-of-eloping-with-a-girl-one-injured-the-other-went-to-jail/">धनबाद
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समाज सुधार के लिए नैतिक मूल्य जरूरी
[caption id="attachment_762158" align="aligncenter" width="600"]alt="" width="600" height="400" /> कार्यक्रम में उपस्थित बच्चे.[/caption] नैतिक शिक्षा की धारणा व आंतरिक सशक्तीकरण से इच्छाओं को कम कर भौतिकवाद की आंधी से बचा जा सकता है. नैतिक शिक्षा से ही सदगुणों का विकास होता है. नैतिक शिक्षा बच्चों को संस्कारों से जोड़ती है. उन्हें उनके कर्तव्यों का ज्ञान कराती है. परिवार, समाज, समूह के नैतिक मूल्यों को स्वीकारना तथा सामाजिक रीति-रिवाजों, परंपराओं व धर्मों का पालन करना सिखाती है. मानगो के ब्रह्माकुमारी राजयोग सेवाकेंद्र की संचालिका बीके रूबी बहन ने कहा कि जिन बच्चों को बचपन से ही सच बोलना, सहयोग करना, दया करना, निष्पक्षता, आज्ञापालन, राष्ट्रीयता, समयबद्धता, सहिष्णुता, करुणा आदि मानवीय गुणों को सिखाते हैं, उन्हीं बच्चों में बाद में चलकर ये ही गुण पुष्पित, पल्लवित व विकसित होकर चरित्र निर्माण में सहायक होते है. स्थानीय ब्रह्माकुमारी सेवाकेंद्र की संचालिया बीके सुकन्या ने सभी को राजयोग सेवाकेंद्र पर आकर नैतिक शिक्षा सिखने के लिए आमंत्रित किया. इसे भी पढ़ें : धनबाद">https://lagatar.in/dhanbad-two-friends-clashed-over-the-issue-of-eloping-with-a-girl-one-injured-the-other-went-to-jail/">धनबाद
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