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चांडिल : रोजगार की तलाश में पलायन कर रहे हैं आर्थिक तंगी झेल रहे छऊ कलाकार

Chandil (Dilip Kumar) : छऊ नृत्य के होनहार युवा कलाकार रोजगार की तलाश में परदेश पलायन कर रहे हैं. यह राज्य के लिए अफसोसजनक है. विलुप्त होती लोक कला को जीवित रखने वाले कलाकारों को अगर अपना और परिवार का भरण-पोषण करने के लिए परदेश जाकर मजदूरी करना पड़े तो यह समाज और सरकार के लिए दुर्भाग्य की बात है. झारखंड सरकार अगर पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल की तर्ज पर लोक कलाकारों को मासिक प्रोत्साहन राशि देती तो शायद ऐसी नौबत नहीं आती. दरअसल, ईचागढ़ प्रखंड के चोगा स्थित नटराज कला केंद्र के सहयोगी कलाकार सुबोध चंद्र प्रमाणिक को परिवार के भरण-पोषण के लिए मजदूरी करने अन्य दो लोगों के साथ गोवा जाना पड़ रहा है. अब वह छऊ नृत्य में भगीदारी निभाने के बजाय गोवा के बीयर कंपनी में काम करेंगे. इसे भी पढ़ें : जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-an-uncontrolled-car-hit-a-student-riding-a-scooty-in-bishtupur/">जमशेदपुर

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ऑलराउंडर कलाकार है सुबोध

नटराज कला केंद्र चोगा, ईचागढ़ के कलाकार सुबोध चंद्र प्रमाणिक खूंटी जिले के अड़की प्रखंड अंतर्गत कुजियामा गांव के रहने वाले है. अंतरराष्ट्रीय छऊ कलाकार प्रभात कुमार महतो ने बताया कि सुबोध छऊ नृत्य के ऑलराउंडर कलाकार है. छऊ के विभिन्न किरदारों में नृत्य करने के साथ वाद्य यंत्रों को बजाने में उन्हें महारथ हासिल है. सुबोध चंद्र प्रमाणिक ने बताया कि बरसात के दौरान काम नहीं मिलने के कारण उसके समक्ष आर्थिक स्थित पैदा हो गई है. परिवार में माता-पिता के अलावा एक छोटा भाई है. बीते वर्ष ही बहन की शादी करवाई थी. गोवा की बीयर कंपनी उन्हें प्रतिमाह 16 हजार रुपये देने के साथ रहने के लिए कमरा देगी. पहले ही दस लोग गोवा जा चुके हैं. अब जब छऊ नृत्य का सीजन आएगा तो वह वापस लौटेंगे. इसे भी पढ़ें : चांडिल">https://lagatar.in/chandil-wild-elephants-broke-the-door-of-the-school-building-and-ate-rice-for-mid-day-meal/">चांडिल

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सरकार ने सुनकार अनसुना कर दी मांग

झारखंड लोक कलाकार संघ के एक प्रतिनिधिमंडल ने प्रभात कुमार महतो के नेतृत्व में मुख्यमंत्री से मिलकर कलाकारों को होने वाली परेशानियों से उन्हें अवगत कराया था. इस दौरान पश्चिम बंगाल की तर्ज पर लोक कलाकारों को मासिक भत्ता, पहचान पत्र, सरकार के अन्य विभागों की भांति प्रत्येक जिला में जिला संस्कृति पदाधिकारी, प्रखंड में प्रखंड संस्कृति पदाधिकारी और पंचायत संस्कृति मित्र बहाल करने के लिए आवश्यक करवाई करने से संबंधित आवेदन दिया था. कलाकारों ने राज्य के वृद्ध एवं अस्वस्थ कलाकारों को मासिक पेंशन देने की भी मांग की थी. लेकिन सरकार ने कलाकारों की मांगों को सुनकर भी अनसुना कर दिया. जिसका नतीजा है कि कलाकार अब मजदूरी करने बाहर जाने को मजबूर हैं. इसे भी पढ़ें : चक्रधरपुर">https://lagatar.in/chakradharpur-mans-hand-chopped-off-by-train-near-railway-station-death/">चक्रधरपुर

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धरातल पर नहीं उतरी योजनाएं

प्रभात महतो ने बताया कि कला संस्कृति विभाग की विभिन्न योजनाएं जो वार्षिक कार्य योजना में तो है लेकिन संचालित नहीं हो रही हैं. इन योजनाओं में राज्य के वृद्ध एवं अस्वस्थ कलाकारों को मासिक पेंशन देने की योजना भी शामिल है, लेकिन इस योजना का लाभ अभी तक एक भी कलाकार को नहीं मिला है. राज्य में विलुप्त हो रही लोक कला विधा के संरक्षण सवर्धन के लिए गुरु शिष्य परंपरा योजना है, जो संचालित नहीं है. सुबह सवेरे व शनिपरब योजना के तहत सभी जिला मुख्यालय में प्रत्येक शनिवार को सुबह के वक्त सुबह सवेरे और शाम में शनिपरब का कार्यक्रम पूर्व में हो रहा था, जो वर्ष 2019 से बंद है. इस योजना के तहत प्रत्येक शनिवार को पूरे राज्य में लगभग 200 कला दलों के लगभग चार हजार कलाकारों के द्वारा विभिन्न कला विधा में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी जाती थी. [wpse_comments_template]

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