- बुधवार को ब्राह्मण भोजन, भोग वितरण व भंडारा के साथ अनुष्ठान का होगा समापन
: निरल, सोनाराम व दीपक को मंत्री बनाने हेतु लॉबी तेज बाल गोपाल और राधा रानी की झांकी के संग श्रद्धालु अपने को रोक नहीं सके और झूमने लगे. श्रीमद्भागवत कथा श्रवण करने बड़ी संख्या में जुटे श्रद्धालु "श्रीकृष्ण गोबिंद हरे मुरारी, हे नाथ नारायण बासुदेवा......, हरे कृष्ण हरे राम, हरि बोल - हरि बोल आदि भजनों पर झूम उठे. बुधवार को सनातन धर्म सम्मेलन का समापन होगा. इस अवसर पर नगर कीर्तन करते हुए चिलगु गांव का भ्रमण किया जाएगा. समापन अवसर पर ब्राम्हण भोजन, भोग वितरण और भंडारा का आयोजन किया गया है. इसे भी पढ़ें : विस">https://lagatar.in/vis-special-session-lambodar-mahato-sat-on-strike-outside-vis-with-many-demands/">विस
विशेष सत्र : लंबोदर महतो विस के बाहर कई मांगों को लेकर धरने पर बैठे
स्वयं नारायण ने ही श्रीकृष्ण अवतार में लिया था जन्म
alt="" width="600" height="400" /> श्रीमद्भागवत कथा के दौरान कथावाचक गिरिधारी शास्त्री महाराज ने बताया कि सनातन धर्म विरोधी श्रीकृष्ण के बाल्यकाल के लीलाओं को अलग कहानियों के रूप में प्रस्तुत करने का दुस्साहस करते हैं, जबकि बाल कन्हैया ने अपने हर लीला में मानव जाति को शिक्षा और संदेश दिया है. उन्होंने कहा कि गोपियों के वस्त्र चुराने की लीला को सनातन विरोधी और अज्ञानी लोग उसे काम भोग के साथ जोड़ते हैं और प्रभु श्रीकृष्ण का अपमान करते हैं. जबकि वस्त्र चुराने की लीला में श्रीकृष्ण की आयु मात्र छह वर्ष की थी और गोपियों की आयु भी वैसी ही थी. इसे भी पढ़ें : AAP">https://lagatar.in/ed-tightens-grip-on-aap-leaders-raids-12-locations-including-kejriwals-private-secretary-mp-nd-gupta/">AAP
नेताओं पर ईडी का शिकंजा, केजरीवाल के निजी सचिव, सांसद एनडी गुप्ता समेत 12 ठिकानों पर छापा क्या छह वर्ष की आयु में किसी को काम की वासना जागृत होती हैं. वस्त्र चुराने की लीला के माध्यम से श्रीकृष्ण ने नारी जाति को मर्यादा में रहने, चरित्रवान बनने और लज्जा रूपी श्रृंगार धारण करने की शिक्षा दी है. उन्होंने बताया कि भगवान नारायण ने ही श्रीकृष्ण अवतार में धरती पर जन्म लिया था. अपने संपूर्ण जीवन के माध्यम से विभिन्न लीलाओं और चमत्कार से मानव समाज को ज्ञान, धर्म, न्याय, चरित्र निर्माण का मार्गदर्शन किया है. [wpse_comments_template]
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