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चांडिल : स्वच्छ पेयजल के लिए तरस रहे जलमग्न ईचागढ़ के विस्थापित, तीन दिनों में झांकने नहीं पहुंचा कोई

Chandil (Dilip Kumar) : बंगाल की खाड़ी में उठा चक्रवात चांडिल डैम के डुबक्षेत्र के गांवों में रहने वाले विस्थापितों के लिए आफत बनकर आया है. चक्रवात के कारण हुई झमाझम बारिश के बाद चांडिल डैम का जलस्तर बढ़ा दिया है. डैम में जलस्तर की तय आंकड़ा से करीब 2.25 मीटर जल भंडारण अधिक हो चुका है. इसके कारण चांडिल डैम के डुब क्षेत्र के दर्जनों गांव जलमग्न हो गया है. घरों में पानी भर जाने से कई घर गिर चुके हैं. ऐसे में विस्थापित परिवार दहशत के साये में रहने पर मजबूर हैं. वहीं कई विस्थापित परिवार सुरक्षित स्थानों में शरण लिए हुए हैं. जलमग्न गांवों के विस्थापितों के लिए प्रशासन की ओर से राहत कार्य चलाया जा रहा है, लेकिन सुरक्षित स्थानों में शरण लिए अधिकतर विस्थापितों तक प्रशासन का राहत सामग्री नहीं पहुंच रहा है. इसे भी पढ़ें : आदित्यपुर">https://lagatar.in/adityapur-demand-for-stoppage-of-south-bihar-and-tata-chapra-express/">आदित्यपुर

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स्वच्छ पेयजल और शौच बनी बड़ी समस्या

चांडिल डैम का जलस्थत बढ़ने से ईचागढ़ गांव पूरी तरह से डूब गया है. गांव के कई विस्थापित परिवार गांव में ही स्कूल और अन्य सुरक्षित स्थानों में हैं. ईचागढ़ स्थित कन्या मध्य विद्यालय के उपरी तल्ले पर करीब 40 लोग शरण लिए हैं. नीचे चारों ओर करीब सात फीट तक पानी ही पानी है. ऐसे में ना कोई शौच के लिए बाहर जा पा रहा है और ना उन्हें पीने के लिए स्वच्छ पेयजल मिल रहा है. उन विस्थापितों के लिए ना प्रशासन ने पेयजल की व्यवस्था की और ना किसी जनप्रतिनिधि ने. सबसे अधिक परेशानी स्कूल में रहने वाले छोटे-छोटे बच्चों की हो रही है. वैसे प्रशासन का राहत कार्य भी जारी है. राहत कार्य के तहत प्रशासन की ओर से ईचागढ़ स्थित करकरी नदी पर बने पुल पर चावल और सब्जी बनाकर पहुंचा दिया गया. लेकिन चावल व सब्जी खाने विस्थापित शरणस्थलों से बाहर कैसे निकले इसकी व्यव्स्था नहीं की गई. प्रशासन ने खाने के साथ पीने के लिए पानी की व्यवस्था नहीं की. लोगों को पीने के लिए पातकुम से पानी ढोकर लाना पड़ रहा है. इसे भी पढ़ें : जगन्नाथपुर">https://lagatar.in/jagannathpur-the-walls-of-many-peoples-houses-collapsed-due-to-incessant-rains/">जगन्नाथपुर

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किसी ने नहीं ली विस्थापितों की सुध

ईचागढ़ गांव में पानी घुसने के कारण रविवार को भी कई परिवार अपना सामान लेकर गांव छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर रवाना हुए. विस्थापित परिवारों का कहना था कि तीन दिनों तक वे जलमग्न थे, लेकिन उनकी सुध लेने ना प्रशासनिक पदाधिकारी पहुंचे और ना कोई जनप्रतिनिधि. विस्थापितों का कहना था कि सरकार उनका बकाया मुआवजा का भुगतान कर दे तो वे पूरी तरह से गांव छोड़ देंगे. घरों में पानी घुसने से विस्थापित आक्रोश में थे. विस्थापितों का कहना था कि सरकार चांडिल डैम के पूरी क्षमता तक जल का भंडारण करें. इससे सभी विस्थापितों को मजबूरन गांव-घर छोड़ देना पड़ेगा. हर साल ऐसे धीरे-धीरे बगैर मुआवजा के जल भंडारण कर घरों को गिराना ठीक नहीं है. [wpse_comments_template]

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