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चांडिल : अनिश्चितकालीन धरना पर बैठे विस्थापितों ने तय किया चरणबद्ध आंदोलन की रूपरेखा

Chandil (Dilip Kumar) : अखिल झारखंड विस्थापित अधिकार मंच के बैनर तले चल रहे अनिश्चितकालीन धरना के दूसरे दिन शनिवार को विस्थापितों की बैठक हुई. बैठक में समस्याओं के समाधान के लिए चरणबद्ध आंदोलन की रूपरेखा तय की गई. विस्थापितों ने अपने आंदोलन को चार चरणों में बांटकर जोरदार आंदोलन करने की योजना बनाई है. धरना-प्रदर्शन से लेकर गेट जाम, महारैली, चांडिल डैम के अधिकारियों के साथ प्रशासन, राजनीतिक दलों के नेता, जनप्रतिनिधियों का बहिष्कार और वोट बहिष्कार करने तक की योजना बनाई गई है. वहीं दूसरी ओर भीषण गर्मी के कारण धरना में शामिल विस्थापितों का बुरा हाल है. इसे भी पढ़ें : गिरिडीह">https://lagatar.in/giridih-ccl-power-supply-restored-in-guhiyatand-cpi-male-protest-canceled/">गिरिडीह

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चार चरणों में होगा आंदोलन

बैठक की जानकारी देते हुए विस्थापित नेता राकेश रंजन महतो ने बताया कि आंदोलन के प्रथम चरण में 16 जून से 25 जून रविवार तक शांतिपूर्वक धरना दिया जाएगा. इस दौरान विस्थापितों की ऐसी समस्याएं जिसका समाधान आदित्यपुर और चांडिल कार्यालय से संभव है, वैसी समस्याओं का समाधान धरना स्थल पर कैंप लगाकर करने की मांग है. ऐसा नहीं होने पर आंदोलन के द्वितीय चरण में 26 जून सोमवार को चांडिल पुनर्वास कार्यालय का गेट जाम किया जाएगा. आंदोलन के तृतीय चरण में पांच जुलाई बुधवार को वार्ता ना हो पाने की स्थिति में धरना स्थल से चांडिल बांध तक 116 गांव विस्थापितों का अधिकार महारैली निकाली जाएगी. वहीं आंदोलन के चतुर्थ चरण में 16 जुलाई रविवार को 116 गांव के विस्थापितों की बैठक होगी, जिसमें प्रशासक, चांडिल डैम अधिकारी, समाजसेवी, सभी राजनीतिक दल के नेता और जनप्रतिनिधियों का बहिष्कार करने की घोषणा की जाएगी. इसे भी पढ़ें : जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-seven-bovine-animals-recovered-in-parsudih-police-engaged-in-investigation/">जमशेदपुर

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होगा वोट का बहिष्कार

अखिल झारखंड विस्थापित अधिकार मंच के संस्थापक राकेश रंजन महतो ने धरना स्थल पर विस्थापितों से मिलने पहुंचे पूर्व गृह राज्य मंत्री और खाद्य प्रसंस्करण मंत्री भारत सरकार सुबोध कांत सहाय और आजसू पार्टी के केंद्रीय सचिव हरेलाल महतो से कहा चांडिल डैम पर 40 वर्षों से राजनीति होते आया है. 2024 चुनाव तक सभी राजनीतिक दलों को विस्थापितों की समस्याओं का समाधान करने का विकल्प देते हैं. समस्याओं का समाधान नहीं होने पर हर राजनीतिक दल का 116 विस्थापित गांवों में सामूहिक रूप से बहिष्कार किया जाएगा. इसके साथ ही आने वाले चुनाव का चांडिल डैम के विस्थापित संपूर्ण रूप से बहिष्कार करेंगे. [wpse_comments_template]

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