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समाज को दिग्भ्रमित कर रहे हैं पूर्व सांसद
मानिक सिंह सरदार ने कहा कि पूर्व सांसद शैलेंद्र महतो का कहना है कि रघुनाथ सिंह नहीं बल्कि रघुनाथ महतो ने जंगल महल में चुआड विद्रोह का नेतृत्व किया था. जबकि इतिहास के पन्नों में रघुनाथ महतो का नाम उल्लेख उस दौर के किसी भी इतिहासकार ने नहीं किया है. उनके द्वारा खुद लिखी गई दो किताब झारखंड के विद्रोह का इतिहास और समर गथा में इसका उल्लेख किया गया है. उन्होंने कहा कि 1700 शताब्दी में घुटियाडिह मौजा बुट पोडसा के नाम पर भू नक्शा में अंकित है. जहां पर उस समय आदिवासी भुमिज समाज का पंचसरदारी चलता था. चुआड विद्रोह के इतिहास को तोड़ मोड़कर लिखे गए दो किताब समाज को दिग्भ्रमित कर रहे हैं. इन दो किताबों की वजह से आदिवासी भूमिज समाज और महतो जाति के आपसी भाईचारे में टकराव का स्थिति बनी हुई है. इसे भी पढ़ें : जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-ss-academy-baliguma-gets-plus-two-recognition-from-cisce/">जमशेदपुर: एसएस एकेडमी बालीगुमा को सीआईएससीई से मिली प्लस-टू की मान्यता आदिवासी भूमिज मुंडा युवा संगठन झारखंड सरकार और राज्यपाल से मांग की है कि पूर्व सांसद द्वारा लिखे गए दोनों कल्पनिक किताब को अविलंब बैन लगाएं. उन्होंने कहा कि भूमिज समाज का आक्रोश कुड़मी जाति पर नहीं बल्कि किताब के लेखक पूर्व भाजपा सांसद शैलेंद्र महतो पर है. जो समाज का इतिहास को तोड़-मरोड़कर समाज को दिग्भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं. बैठक में जयनाथ सिंह सरदार, कोकिल सिंह सरदार, सनातन सरदार, बाघांबर सिंह सरदार, परमेश्वर सरदार, शिवा सिंह सरदार, सुषेण सिंह सरदार, दिवाकर सरदार, जय सिंह, चंदन सिंह मुंडा, लक्ष्मण सिंह मुंडा, रसराज सिंह सरदार, भूतनाथ सिंह सरदार, लालू सिंह, सुरेंद्र सिंह, मोहन सिंह, कांत सिंह पातर, हरिपद सिंह भूमिज समेत आदिवासी भूमिज मुंडा युवा संगठन के चांडिल, नीमडीह, ईचागढ़, कुकडू, गम्हरिया, सरायकेला अादि स्थानों से समाज के प्रतिनिधि उपस्थित थे. [wpse_comments_template]

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