- सरस्वती मंदिर में स्थापित है देवी की मूर्ति, लगता है पांच दिवसीय मेला
: केवी मेघाहातुबुरु में शिक्षकों और अभिभावकों की हुई बैठक चांडिल के हारुडीह स्थित मां सरस्वती मंदिर के पूजा व मेला कमेटी के सचिव लक्ष्मीकांत महतो ने बताया कि पूर्वजों द्वारा शुभारंभ किए गए सरस्वती मेला के आयोजन की परंपरा को अब भी निष्ठा व श्रद्धापूर्वक मनाया जा रहा है. मेला में विभिन्न भाषाओं के सांस्कृतिक कार्यक्रम का संगम श्रद्धालु और दर्शकों के लिए आस्था व आकर्षण का केंद्र रहता है. इस वर्ष सरस्वती पूजा के उपलक्ष्य पर यहां 21 फरवरी तक रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया है. इसे भी पढ़ें : बहरागोड़ा">https://lagatar.in/baharagora-elephant-attacks-qrt-while-driving-away-elephants-one-dead/">बहरागोड़ा
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रोज होगा मुर्गा पाड़ा
alt="" width="600" height="400" /> उन्होंने बताया कि मेला में रोज सुबह मुर्गा पाड़ा का आयोजन किया जाएगा. बुधवार को परंपरा के अनुसार देवी की पूजा-अर्चना के बाद प्रसाद का वितरण किया गया. शाम को हारुडीह के देलका डांस ग्रुप के कलाकरों ने आकर्षक डांस प्रस्तुत किया. वहीं मेला के पहले दिन 16 फरवरी शुक्रवार को दिन में मुर्गा पाड़ा का आयोजन किया गया है. इसके बाद शाम को माधुरी डांस ग्रुप करनडीह के कलाकार डांस प्रस्तुत करेंगे. इसके बाद 17 फरवरी शनिवार को दिन दस बजे से मुर्गा पाड़ा, आदिवासी पांता नाच के साथ दोपहर दो बजे से तपती महतो, झाड़ग्राम के झुमर कलाकार झुमर संगीत पेश करेंगे. वहीं रात को ज्योत्सना देवी और बिजली देवी बाई नाच प्रस्तुत करेंगी. रात को ही आदिम ओवर जारपा ओपेरा मयुरभंज ओडिशा की ओर से आदिवासी ड्रामा गाते दुलाड़ ताला रेईञ मा मेनाय जालारे का मंचन किया जाएगा. ऐतिहासिक सरस्वती मेला में झारखंड के अलावा पश्चिम बंगाल और ओडिशा से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं. इसे भी पढ़ें : हेमंत">https://lagatar.in/vinod-singh-close-to-hemant-soren-reached-ed-office/">हेमंत
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