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चांडिल : विस्थापितों का तमाशा ना बनाए सरकार, गहन समीक्षा करे

Chandil (Dilip Kumar) : सरकार प्रतिवर्ष चांडिल डैम के विस्थापितों के साथ छलावा ना करे, उनका तमाशा ना बनाए. 14 सौ करोड़ की योजना छह हजार से अधिक का हो गया, लेकिन विस्थापितों के लिए अबतक किसी प्रकार का कोई विशेष पैकेज की घोषणा नहीं की गई. अधूरे डैम के रख-रखाव के लिए हर साल नई-नई योजना बनाई जाती है. लेकिन सरकार हर साल विस्थापितों के लिए एक बार भी समीक्षा तक नहीं करती है. उक्त बातें विस्थापित मुक्ति वाहिनी के नेता नारायण गोप ने कही. उन्होंने कहा कि चांडिल डैम के विस्थापितों के मामले में जनप्रतिनिधि भी गंभीर नहीं हैं. चाहे किसी भी दल का जनप्रतिनिधि हो सभी ने विस्थापितों को छलने का काम किया है. चुनाव के समय लंबे-चौड़े वादे करने वाले नेता चुनाव जीतकर विस्थापितों को भूल जाते हैं. इसे भी पढ़ें : चाईबासा">https://lagatar.in/chaibasa-irregularity-in-the-scheme-wages-are-also-being-given-less/">चाईबासा

: योजना में अनियमितता, मजदूरी भी कम दी जा रही है

कोरम पूरा करने के लिए होती है आपदा प्रबंधन की बैठक

नारायण गोप ने कहा कि कोरम पूरा करने के लिए पदाधिकारी आपदा प्रबंधन की बैठक करते हैं. हर साल चांडिल डैम के विस्थापित बरसात के दौरान जलमग्न रहते हैं. उनका गांव-घर डूब जाता है और उस समय क्षेत्र के पदाधिकारी और जनप्रतिनिधि गायब हो जाते हैं. बगैर मुआवजा और पुनर्वास सुविधा के हर साल विस्थापितों के मकान जल जमाव के कारण गिर रहे हैं, विस्थापित बेघर हो रहे हैं और सरकार हर साल डैम में जल भंडारण बढ़ाकर उन्हें प्रताड़ित करने का काम कर रही है. सरकार को विस्थापितों के वर्तमान स्थिति की समीक्षा करते हुए यह स्पष्ट करना चाहिए कि 40 वर्षों में विस्थापितों को संपूर्ण मुआवजा, पुनर्वास और रोजगार क्यों नहीं मिला. एक ओर सरकार 185 मीटर जल भंडारण का आदेश देती है और दूसरी ओर उन्हीं के दल के विधायक इस मामले में सरकार से बात करने का आश्वासन देते हैं. [wpse_comments_template]

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