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चांडिल : हेमंत सरकार को है शिक्षा और शिक्षकों से नफरत : कुणाल दास

 
Chandil (Dilip Kumar) : राज्य के प्रारंभिक स्कूलों में प्रस्तावित सहायक आचार्य नियुक्ति प्रक्रिया के विरुद्ध पारा शिक्षक गैर पारा जेटेट सफल अभ्यर्थी संघ झारखंड प्रदेश ने आक्रोश जताया है. संघ ने इस नियुक्ति को सूबे की शिक्षा और शिक्षक समुदाय के प्रति विध्वंसकारी बताया है. शुक्रवार को संघ के प्रदेश अध्यक्ष कुणाल दास ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि हेमंत सरकार को शिक्षा और शिक्षक शब्द से ही नफरत है. जेटेट सफल अभ्यर्थियों को मेरिट लिस्ट के आधार पर सहायक शिक्षक के पद पर नियुक्त किए जाने का प्रावधान है. चूंकि पुरानी नियमावली अभी भी अस्तित्व में है बावजूद इसके बाहरी अफसरों के बहकावे पर नियमों को ताक पर रखकर हेमंत सरकार ने सहायक आचार्य नियुक्ति का विज्ञापन जारी किया है. इसे भी पढ़ें : प्राकृतिक">https://lagatar.in/plantation-and-seminar-in-ranchi-university-on-natural-conservation-day/">प्राकृतिक

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सात से नौ घंटे की परीक्षा यूपीएससी में भी नहीं

नई शिक्षा नीति के तहत अब किसी भी सरकारी स्कूल में अलग-अलग कैडर नहीं हो सकते. लेकिन सहायक आचार्य नियुक्ति हो जाने के बाद सरकारी स्कूलों में सहायक शिक्षक, सहायक अध्यापक (पारा शिक्षक) और सहायक आचार्य तीन अलग-अलग कैडर के शिक्षक मौजूद होंगे जो पूरी तरह से नई शिक्षा नीति का उल्लंघन है. इसके अलावा झारखंड में अबतक आयोजित दोनों ही जेटेट परीक्षा में सफल अभ्यर्थी सहायक शिक्षक बनने की पात्रता रखते हैं, न कि सहायक आचार्य की. सहायक आचार्य के लिए तो अभी तक कोई पात्रता परीक्षा ही आयोजित नहीं हुई है, फिर सरकार जबरन सहायक शिक्षक के लिए एलिजिबल अभ्यर्थियों को सहायक आचार्य किस आधार पर बना रही है. वहीं सहायक आचार्य नियुक्ति नियमावली में जिस प्रकार से सात से नौ घंटे परीक्षा का प्रावधान किया गया है ऐसा प्रारूप यूपीएससी परीक्षा में भी नहीं होता है. कुणाल दास ने बताया कि अब सारी चीजें हेमंत सरकार के नियंत्रण से बाहर जा चुकी हैं, इसलिए संघ ने हाईकोर्ट का रुख अख्तियार कर लिया है. [wpse_comments_template]
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