- स्थानीय, नियोजन व उद्योग नीति के बगैर विकास संभव नहीं
- सीएनटी व एसपीटी एक्ट को कड़ाई से किया जाएगा लागू
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जमीन ही हमारी अस्मिता है
[caption id="attachment_931137" align="aligncenter" width="600"]alt="" width="600" height="400" /> महासभा में उपस्थित भीड़.[/caption] उन्होंने कहा कि वे सरकार में आए तो पहले किसानों की जमीन सुरक्षित करेंगे. अपनी कथनी और करनी में अंतर होने के कारण ही राज्य की हेमंत सोरेन सरकार स्वयं को कटघरे में खड़ा कर रही है. चुनाव के समय उन्होंने वादा किया था कि स्थानीय नीति बनाएंगे, जीएम लैंड पर रसीद काटने की बात कही थी. 25 करोड़ तक का ठेका स्थानीय लोगों को देने की बात कही थी. विस्थापन आयोग बनाने का वादा किया था. उन्होंने एक भी वादा पूरा नहीं किया. जयराम महतो ने कहा कि विस्थापितों की समस्या सरकार के एक कलम से होगी. लेकिन सरकार तो पूंजीपतियों का रखवाला और पालनहार बनकर काम कर रही है. उन्होंने कहा कि अगर राज्य में उनकी सरकार बनी तो सबसे पहले किसानों की जमीन सुरक्षित किया जाएगा. जमीन ही हमारी अस्मिता है, जिसपर दूसरे राज्यों के लोगों को कब्जा होता जा रहा है. इसे भी पढ़ें : Jamshedpur">https://lagatar.in/jamshedpur-dc-will-start-mega-thalassemia-awareness-program-on-10th/">Jamshedpur
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हर एक घर में निर्मल दा की जरूरत
बड़ामटांड फुटबॉल मैदान में आयोजित ईचागढ़ विधानसभा स्तरीय बदलाव संकल्प महासभा को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि झारखंड की जमीन, रोजगार, युवाओं के भविष्य समेत हर मामले में दूसरे राज्यों के लोगों का अवैध कब्जा होता जा रहा है. लोगों को सबसे पहले अपनी अस्मिता की रक्षा करनी चाहिए और वो अस्मिता जमीन के रूप में है. सीएनटी-एसपीटी एक्ट रहने के बावजूद राज्य की जमीन लूटी जा रही है और सरकार मूकदर्शक बनकर बैठी है. राज्य में बांग्लादेशियों का कब्जा भी बदस्तूर जारी है. उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य आदि के नाम पर किसानों की जमीन ली जा रही है और बदले में दूसरे राज्य के लोगों को नौकरी देकर जमीनदाता किसानों से मजदूरी कराई जा रही है. ऐसे विकट समय में अब हर घर में शहीद निर्मल महतो की जरूरत है. टाटा कंपनी ने जितनी जमीन ली उसके आधे में भी कंपनी नहीं बनाई. बाकी जमीन में दूसरे राज्यों के लोगों को बसाने का काम कर रही है. ऐसा नहीं होने दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि झारखंड अलग राज्य झारखंडियों के विकास के लिए बना था. किसी एक परिवार के विकास के लिए नहीं. केंद्र की तरह राज्य की सरकार भी पूंजीपतियों के इशारे पर काम कर रही है, जो राज्य हित में नहीं है. विधानसभा स्तरीय बदलाव संकल्प महासभा में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए. इसे भी पढ़ें : Dumaria">https://lagatar.in/dumaria-tribals-are-worshipers-and-protectors-of-nature-mla/">Dumaria: आदिवासी प्रकृति के पूजक और रक्षक हैं – विधायक
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