Chandil (Dilip Kumar) : चांडिल डैम से हुए 116 गांव के विस्थापित अपनी मांगों को लेकर पुनर्वास कार्यालय के समीप बुधवार से अनिश्चितकालीन आमरन अनशन पर बैठ गए. विस्थापितों की मांग है कि राज्य सरकार ने चांडिल डैम बनाने के लिए जमीन अधिग्रहण के दौरान जो वादे किए थे उसे पूरा करे. सरकार के किए वादे के अनुसार प्रत्येक विस्थापित परिवार को सरकारी नौकरी, पुनर्वास के लिए विस्थापित परिवार को 25 डिसमील जमीन, जबतक विस्थापितों को सरकारी नौकरी और पुनर्वास के लिए 25 डिसमील जमीन नहीं दिया जाता तबतक चांडिल डैम का जलस्तर 177 मीटर रखने समेत अन्य कई वादा किया था. सरकार का किया वादा पूरा नहीं हुआ है और चांडिल डैम का जलस्तर लगभग 184 मीटर तक पहुंचा दिया गया था. यह सरासर वादा खिलाफी है. संगठन के नेताओं ने चांडिल डैम के मामले में सीबीआई जांच की मांग की है.
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सरकार द्वारा किया गया वादा पूरा होने तक डैम का जलस्तर 177 मीटर तक रखने के लिए 116 गांव के विस्थापितों ने विभाग को पांच दिनों का अल्टीमेटम दिया था. बावजूद विस्थापितों की मांग पूरी नहीं हुई. 116 गांव विस्थापितों ने कहा विभागीय अधिकारी व सरकार विस्थापितों से किए गए वादे से मुकर रही है. विभाग और सरकार अबतक इस मुद्दे पर कोई पहल नहीं कर रही है. बरहाल विभाग द्वारा चांडिल डैम का जलस्तर कभी 183 मीटर या 184 मीटर तक बढ़ाकर विस्थापितों को बेघर किया जा रहा है. विस्थापितों का कहना है जबतक उनका पूर्ण हक व अधिकार नहीं मिलेगा वे अनिश्चितकालीन आमरन अनशन पर बैठे रहेंगे.
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आमरन अनशन के पहले दिन संगठन से जुड़े दस लोग आमरण अनशन पर बैठे. आमरण अनशन पर बैठने वालों में चंद्रप्रकाश साहदेव, रूपेश वर्मा, कालाचांद धीवर, अर्जुन सिंह, राम कैलाश सिंह यादव, विजय दास, अस्वस्थामा कर्मकार, लुथू सिंह मुंडा, रिंकु महतो व आशु कालिंदी शामिल है. अपनी मांगों को लेकर आमरन अनशन पर बैठे विस्थापितों को पहले दिन से ही स्थानीय नेता व सामाजिक कार्यकर्ताओं का व्यापक समर्थन मिलने लगा है. आमरण अनशन के पहले दिन स्थानीय समाजसेवी खगेन महतो, एनएसयूआई के जिलाध्यक्ष निखिल चंद्र महतो समेत अन्य कई संगठनों के नेता व सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अनशन स्थल पर जाकर नैतिक समर्थन दिया. [wpse_comments_template]
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