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चांडिल : पुनर्वास कार्यालय के समक्ष विस्थापितों का अनिश्चितकालीन धरना 16 जून से

Chandil (Dilip Kumar) : विस्थापित अधिकार मंच के बैनर तले सात सूत्री मांगों के समर्थन में 16 जून से पुनर्वास कार्यालय के समक्ष अनिश्चितकालीन धरना दिया जाएगा. इसको लेकर तैयारियां शुरू कर दी गई है. इसकी जानकारी देते हुए विस्थापित अधिकार मंच के राकेश रंजन महतो ने बताया कि चांडिल डैम के 84 मौजा के 116 गांवों के विस्थापितों को एक बार फिर जागरूक किया जा रहा है. शुक्रवार को चांडिल डैम के निकट स्थित शीशमहल में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने बताया कि कुल सात प्रमुख मांगों के समर्थन में एक बार फिर विस्थापित एकजुट होकर अपना आंदोलन करेंगे. पत्रकार सम्मेलन में गुरुपद महतो, प्रशांत कुमार महतो, सुमित कुमार महतो, तपन महतो, परमेश्वर महतो, विकास मंडल, रतिकांत गोप, भाग्यवान महतो, फूलचंद महतो, गोपेश महतो, परिमल महतो, आदित्य महतो आदि शामिल थे. इसे भी पढ़ें : गिरिडीह">https://lagatar.in/giridih-jharkhand-animal-husbandry-department-ai-employees-union-staged-a-sit-in-for-five-point-demands/">गिरिडीह

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क्या है विस्थापित अधिकार मंच की मांगें

विस्थापित अधिकार मंच की मांगों में चांडिल डैम द्वारा विस्थापन के बदले दिया गया नौकरी, निर्गत किया गया विकास पुस्तिका, निर्गत किया गया पुनर्वास पैकेज और पुनर्वास स्थल पर अधिग्रहण किए गए प्लॉट की जांच की जाए. चांडिल डैम के पूर्ण एवं आंशिक रूप से 116 विस्थापित गांवों का भू-अर्जन वर्ष 2001 तक किया गया है, लेकिन अभी तक विस्थापितों का पूर्ण नियोजन नहीं हुआ है. विकास पुस्तिका के अनुसार प्रत्येक विस्थापित परिवार को सरकारी नौकरी दिया जाए या उच्चतम न्यायालय द्वारा आठ फरवरी 2017 को मध्य प्रदेश में नर्मदा नदी पर सरदार सरोवर परियोजना के प्रत्येक विस्थापित परिवार के लिए 60 लाख रुपये मुआवजा देने के आदेश के तर्ज पर चांडिल डैम के विस्थापितों को भी 60 लाख मुआवजा दिया जाए, 1990 के पूनर्वास नीति के अनुसार सभी विस्थापितों को पूनर्वास के लिए 25 डिसमिल भूखंड दिया जाना था, पर पुनरीक्षित पुनर्वास नीति 2012 के प्रावधानों (कंडिका-5.1 (क) के मुताबिक, अब 12.5 डिसमिल दिया जाना है. जिसे फिर से 25 डिसमिल किया जाए. इसे भी पढ़ें : मनोहरपुर">https://lagatar.in/manoharpur-tenderers-did-not-reach-residential-school-tender-canceled/">मनोहरपुर

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आश्रितों के नाम जारी हो विकास पुस्तिका

झारखंड सरकार ने 2008 में पुनर्स्थापना एवं पुनर्वास नीति बनाया गया था. 2008 वर्ष को आधार मानकर भू-अर्जन अधिनियम की धारा- 4 के अंतर्गत विकास पुस्तिका में अंकित सदस्यों का उम्र 2008 तक 18 वर्ष पूर्ण होने वाले सभी सदस्यों का नाम विकास पुस्तिका में निर्गत किया जाए. चांडिल डैम प्रबंधन द्वारा जमीन अधिग्रहण करके 40 वर्ष बीत गए, विकास पुस्तिका में कई परिवार के प्रमुख की मृत्यु हो चुकी है. उक्त विकास पुस्तिका के आश्रितों के नाम विकास पुस्तिका निर्गत किया जाए, पुनर्वास की समस्या ज्यों का त्यों बनी हुई है. अतः 116 गांवों का ही पुनर्वास सुविधाएं पुनरीक्षित पुनर्वास नीति 2012 के प्रावधानों (कंडिका 5.5) के अनुसार मूलभूत सुविधा उपलब्ध कराया जाए. पुनर्वास स्थल पर बसे हुए विस्थापितों के नाम जमीन का पट्टा दिया जाए. मांगें पूरी होने तक चांडिल डैम का जल भंडारण 177 मीटर रखा जाए और 177 मीटर से उपर जलस्तर बढ़ाने से पहले डूब क्षेत्र में प्रशासनिक जन सूचना जारी किया जाए. [wpse_comments_template]

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