Chandil (Dilip Kumar) : सिंहभूम कॉलेज चांडिल परिसर में सोमवार को करम पर्व का आयोजन किया गया. आदिवासी कल्याण छात्रावास के छात्रों की ओर से आयोजित करम मिलन समारोह में सबसे पहले पारंपरिक नियमानुसार करम डाली की स्थापना की गई. विधिवत पूजा-अर्चना के बाद प्रसाद का वितरण किया गया. आयोजन में शामिल सभी लोगों ने एक साथ खिचड़ी प्रसाद ग्रहण किया और करम पर्व का उत्साह मनाया. मांदर और नगाड़ा की थाप पर सामूहिक रूप से करम नाच किया गया. कार्यक्रम में करम नृत्य पेश करने के लिए सरना समाज सुसन दुराई बारीगोरा दल को आमंत्रित किया गया था. दल के सदस्यों ने आकर्षक करम नृत्य प्रस्तुत कर सभी को झूमने पर विवश किया. इसे भी पढ़ें : आदित्यपुर">https://lagatar.in/adityapur-deendayal-jayanti-celebrated-in-booth-number-130-of-ward-30/">आदित्यपुर
: वार्ड 30 के बूथ नंबर 130 में मना दीनदयाल जयंती
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alt="" width="600" height="400" /> इस अवसर पर कॉलेज के प्राचार्य सरोज कुमार कैवर्त, गणित विभाग के अध्यक्ष एके गोराई, झामुमो नेता सुकराम हेंब्रम, सुधीर किस्कू समेत बड़ी संख्या में क्षेत्र के गणमान्य शामिल हुए. अतिथियों ने भी मांदर व नगाड़ा बजाकर और नृत्य कर करम पर्व मनाया. मौके पर प्राचार्य ने कहा कि अपनी परंपरा और संस्कृति ही व्यक्ति का असल पहचान होता है. इसलिए युवाओं को अपनी परंपरा और संस्कृति से प्रेम करना चाहिए. इस अवसर पर झामुमो नेता सुकराम हेंब्रम ने कहा कि करम परब प्रकृति के साथ झारखंडियों के सानिध्य का बोध कराता है. झारखंड के मूल निवासियों का परब प्रकृति से जुड़ा है. उन्होंने कहा कि पारंपरिक पहचान को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए युवाओं को आगे आने की जरूरत है. [wpse_comments_template]
: वार्ड 30 के बूथ नंबर 130 में मना दीनदयाल जयंती
परंपरा और संकृति ही असली पहचान
alt="" width="600" height="400" /> इस अवसर पर कॉलेज के प्राचार्य सरोज कुमार कैवर्त, गणित विभाग के अध्यक्ष एके गोराई, झामुमो नेता सुकराम हेंब्रम, सुधीर किस्कू समेत बड़ी संख्या में क्षेत्र के गणमान्य शामिल हुए. अतिथियों ने भी मांदर व नगाड़ा बजाकर और नृत्य कर करम पर्व मनाया. मौके पर प्राचार्य ने कहा कि अपनी परंपरा और संस्कृति ही व्यक्ति का असल पहचान होता है. इसलिए युवाओं को अपनी परंपरा और संस्कृति से प्रेम करना चाहिए. इस अवसर पर झामुमो नेता सुकराम हेंब्रम ने कहा कि करम परब प्रकृति के साथ झारखंडियों के सानिध्य का बोध कराता है. झारखंड के मूल निवासियों का परब प्रकृति से जुड़ा है. उन्होंने कहा कि पारंपरिक पहचान को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए युवाओं को आगे आने की जरूरत है. [wpse_comments_template]
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