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चांडिल : विधिक साक्षरता कार्यक्रम के तहत ग्रामीणों को दी गई कानूनी जानकारी

Chandil (Dilip Kumar) : नालसा एवं झालसा द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में मौलिक अधिकार के रूप में कानूनी जानकारी देकर जागरूक करने का कार्य लगातार किया जा रहा है. इसी कड़ी में चांडिल अनुमंडल क्षेत्र अंतर्गत नीमडीह प्रखंड के आदरडीह गांव में बुधवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकार सरायकेला-खरसावां की ओर से विधिक साक्षरता कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस दौरान ग्रामीणों को अपने मौलिक अधिकार अधिनियम के संबंध में जानकारी दिया गया. इसके साथ सामाजिक रूढ़ीवादी परंपराओं के खिलाफ लोगों को जागरूक किया गया. इस अवसर पर मुखिया सुभाष सिंह, सुमंत्रा दास, कमला कुमार, सुभद्रा कुमारी, गंगा कुमारी समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे. इसे भी पढ़ें : चांडिल">https://lagatar.in/chandil-cultural-workshop-organized-at-mount-academy-school-ichagarh/">चांडिल

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नेत्रहीनों को विशेष श्रेणी देता है संकुचित व्यक्ति अधिनियम

कार्यक्रम में पीएलवी शुभंकर महतो ने कहा कि भारत सरकार ने संकुचित व्यक्ति अधिनियम,1995 में लागु किया था. यह अधिनियम नेत्रहीनों के अलावा कम दृष्टि वाले लोगों के लिए एक विशेष श्रेणी प्रदान करता है. इसके अतिरिक्त पीएलवी शुभंकर महतो ने रूढ़ीवादी परंपरा जैसे बाल विवाह, बाल श्रम, डायन प्रथा, दहेज प्रथा आदि के खिलाफ जागरूक करते हुए लोगों को इसके कानूनी पहलुओं की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि माता-बहनों को डायन जैसे निराधार आरोप लगाकर प्रताड़ित करना न्यायसंगत नहीं है. उन्होंने कहा कि डायन कहने पर अजमानतीय धारा के तहत कार्रवाई हो सकता है. उन्होंने कहा कि बाल विवाह व बाल मजदूरी एक कानुनी अपराध है, इससे बचने की जरूरत है. [wpse_comments_template]

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