Chandil (Dilip Kumar) : श्री साधु बांध मठिया मठ नागा संन्यासी आश्रम चांडिल में रविवार को महाप्रभु भगवान जगन्नाथ को 108 कलश जल से महास्नान कराया गया. मुख्य पुरोहित आचार्य मधुसूदन जोशी, पवन कुमार त्रिवेदी, काशी से अंकित शर्मा, चांडिल के बच्चा तिवारी समेत अन्य पुरोहितों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ दूध, दही, घी, पंचामृत, गुलाब, जल, चंदन और हल्दी के मिश्रण से महाप्रभु के साथ बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा को स्नान कराया. देव स्नान पूर्णिमा के अवसर पर आश्रम स्थित श्रीश्री जगन्नाथ मंदिर में सुबह से ही भक्तों की भीड़ रही. इसे भी पढ़ें : चाईबासा">https://lagatar.in/chaibasa-villagers-protest-against-the-arbitrariness-of-rks-construction/">चाईबासा
: आरकेएस कंस्ट्रक्शन की मनमानी के खिलाफ ग्रामीणों ने की आक्रोश सभा
https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/06/04-chandil-4_217.jpg"
alt="" width="600" height="400" /> मंदिर में पूजा-अर्चना करते श्रद्धालु[/caption] इस संबंध में जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्रीमहंत विद्यानंद सरस्वती ने बताया कि महाप्रभु भगवान जगन्नाथ को 108 कलश जल से महास्नान कराया गया. इसमें गंगाजल, पंचामृत व औषधीय मिश्रित जल मिलाया गया था. उन्होंने बताया कि परंपरा अनुसार अब भगवान बीमार हो जाते हैं. इस दौरान भगवान जगन्नाथ एकांतवास में चले जाते हैं. जहां महाप्रभु का जड़ी-बूटी से इलाज किया जाता है. भक्तों के लिए अगले 14 दिनों तक मंदिर का कपाट बंद रहेगा. इसके साथ ही अब रथयात्रा की तैयारी आरंभ हो चुकी है. 18 जून को भक्त महाप्रभु के नवजीवन रूप का दर्शन कर सकेंगे. जिसे नेत्र उत्सव कहा जाता है. मंदिर के पट खुलने के बाद भक्त महाप्रभु भगवान जगन्नाथ के दर्शन कर सकेंगे. इसे भी पढ़ें : घाटशिला">https://lagatar.in/ghatshila-rally-will-start-from-ghatshila-college-on-june-5-on-world-environment-day/">घाटशिला
: विश्व पर्यावरण दिवस पर 5 जून को घाटशिला कॉलेज से निकलेगी रैली
: आरकेएस कंस्ट्रक्शन की मनमानी के खिलाफ ग्रामीणों ने की आक्रोश सभा
बीमार हुए महाप्रभु, 18 को नेत्र उत्सव
[caption id="attachment_657724" align="aligncenter" width="600"]alt="" width="600" height="400" /> मंदिर में पूजा-अर्चना करते श्रद्धालु[/caption] इस संबंध में जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्रीमहंत विद्यानंद सरस्वती ने बताया कि महाप्रभु भगवान जगन्नाथ को 108 कलश जल से महास्नान कराया गया. इसमें गंगाजल, पंचामृत व औषधीय मिश्रित जल मिलाया गया था. उन्होंने बताया कि परंपरा अनुसार अब भगवान बीमार हो जाते हैं. इस दौरान भगवान जगन्नाथ एकांतवास में चले जाते हैं. जहां महाप्रभु का जड़ी-बूटी से इलाज किया जाता है. भक्तों के लिए अगले 14 दिनों तक मंदिर का कपाट बंद रहेगा. इसके साथ ही अब रथयात्रा की तैयारी आरंभ हो चुकी है. 18 जून को भक्त महाप्रभु के नवजीवन रूप का दर्शन कर सकेंगे. जिसे नेत्र उत्सव कहा जाता है. मंदिर के पट खुलने के बाद भक्त महाप्रभु भगवान जगन्नाथ के दर्शन कर सकेंगे. इसे भी पढ़ें : घाटशिला">https://lagatar.in/ghatshila-rally-will-start-from-ghatshila-college-on-june-5-on-world-environment-day/">घाटशिला
: विश्व पर्यावरण दिवस पर 5 जून को घाटशिला कॉलेज से निकलेगी रैली
Leave a Comment