Chandil (Dilip Kumar) : चांडिल अनुमंडल क्षेत्र के विभिन्न स्थानों में शुक्रवार को हूल दिवस के अवसर पर अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन करने वाले आदिवासी वीर सपूतों की शौर्य गाथा और बलिदान को याद किया गया. चांडिल गोलचक्कर में स्थापित सिदो-कान्हू की प्रतिमा पर राज्य सरकार के मंत्री चंपई सोरेन, ईचागढ़ की विधायक सविता महतो के अलावा विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता, सामाजिक कार्यकर्ता, छात्र संगठनों के नेता, पुलिस-प्रशासन के पदाधिकारी आदि ने अंग्रेजी हुकूमत, महाजनी प्रथा व बंदोबस्ती के खिलाफ आंदोलन का शंखनाद करने वाले वीर शहीदों को श्रद्धा सुमन अर्पित किया. इसे भी पढ़ें : बहरागोड़ा">https://lagatar.in/bahragora-hull-day-celebrated-in-netaji-shishu-udyan-rally-taken-out/">बहरागोड़ा
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अच्छी सोच और निस्वार्थ सेवा कमजोर नहीं होता
वीर शहीद सिदो-कान्हू को श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद मंत्री चंपई सोरेन ने कहा कि अच्छी सोच, निस्वार्थ सेवा और समाज के लिए शुरू किया गया काम कभी कमजोर नहीं हो सकता. उन्होंने कहा कि संथाल विद्रोह मुट्ठी भर आदिवासियों ने शुरू किया था, जो बाद में जन आंदोलन बन गया. आजादी के आंदोलन में संथाल के आदिवासियों का हूल विद्रोह बेहद प्रभावशाली रहा. मौके पर सविता महतो ने कहा कि सिदो-कान्हू, चांद-भैरव, फुलो-झानो के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता. जिस दिन हम इनके संघर्ष गाथा को भुला देंगे उसी दिन झारखंड और झारखंडी समाज का विकास अवरूद्ध हो जाएगा. इसे भी पढ़ें : जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-the-purpose-for-which-the-hull-was-created-it-has-not-been-fulfilled-aidso/">जमशेदपुर: जिस उद्देश्य के लिए हूल हुआ, वह पूरा नहीं हुआ : एआईडीएसओ
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