: गुवा बाजार सहित विभिन्न दुर्गा मंडप में की गई मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना
धूमधाम से की जाती है पूजा
शरद पूर्णिमा के पर्व को कोजागरी पूर्णिमा, कमला पूर्णिमा, कौमुदी उत्सव, कुमार उत्सव, शरदोत्सव, रास पूर्णिमा आदि नाम से भी जाना जाता है. चांडिल अनुमंडल क्षेत्र में बंगाली परंपरा चलने के कारण क्षेत्र के लोग शरद पूर्णिमा के दिन कोजागरी लक्खी की पूजा करते हैं. इस दिन दुर्गा पूजा किए गए सभी मंदिर व पूजा पंडालों में मां लक्खी की पूजा की जाती है. चांडिल, चौका, रघुनाथपुर, ईचागढ, तिरूलडीह समेत अन्य क्षेत्रों में लक्खी पूजा को लेकर लोगों में उत्साह देखा जा रहा है. सभी स्थानों में लक्खी पूजा को लेकर सारी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. सभी पूजा पंडालों व मंदिरों में मां लक्खी की प्रतिमा स्थापित की गई है. इसके अलावा श्रद्धालु अपने-अपने घरों में भी मां लक्खी की पूजा करते हैं. शरद पूर्णिमा पर दीपदान की परंपरा भी है. इस दिन श्रीकृष्ण ने गोपियों संग महारास रचाया था. मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की चांदनी में विशेष औषधीय गुण होते हैं, जिनसे विभिन्न प्रकार के असाध्य रोगों का निवारण होता है. मान्यता है कि आश्विन मास की पूर्णिमा तिथि पर आसमान से जमीन पर अमृत की वर्षा होती है. इसे भी पढ़ें : Chandil">https://lagatar.in/chandil-wild-elephant-crushed-a-person-to-death-anger-among-people/">Chandil: जंगली हाथी ने एक व्यक्ति को कुचलकर मार डाला, लोगों में आक्रोश [wpse_comments_template]
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