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चांडिल : कोटशिला जंक्शन पर आदिवासी कुड़मी समाज का आंदोलन शुरू

Kotshila (Dilip Kumar) : पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिला अंतर्गत कोटशिला रेलवे स्टेशन परिसर में हजारों की तादाद में जयगोराम लिखा हुआ पीला झंडा हाथों में लिए और पीला गमछा कंधे पर लिए भीड़ जुटी है. कुड़मी जनजाति को एसटी में सूचीबद्ध करने के साथ कुड़माली भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने और सरना कोड लागू करने की मांग पर सभी रेल चक्का जाम आंदोलन में शामिल होने पहुंचे थे. तीखी धूप के कारण लोग रेल पटरियों पर कम और प्लेटफार्म व पेड़ की छांव में अधिक नजर आ रहे थे. दोपहर के लगभग 3:30 बजे भीड़ का एक बड़ा हिस्सा झालदा रेलवे स्टेशन की ओर पटरियों पर आधा किलोमीटर तक दौड़ते हुए नारेबाजी करते हुए गए. वहां पता चला कि रास्ते में रेलवे की पैकिंग गाड़ी आ रही है. करीब आधा किलोमीटर दूर जाने के बाद भी लोगों को कोई गाड़ी नहीं मिली. वहीं स्थानीय लोगों ने बताया कि एक गाड़ी अभी आई थी, जो तुरंत वापस चली गई. इसके बाद आंदोलनकारी नारेबाजी करते हुए कोटशिला स्टेशन की ओर लौट गए.
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पानी के लिए लगी भीड़

आंदोलन स्थल कोटशिला रेलवे जंक्शन में बड़ी तादाद में उपस्थित आंदोलनकारी जहां अपनी मांगों को लेकर किए जा रहे आंदोलन से उत्साहित थे, वहीं तीखी धूप के कारण पीने के लिए पानी की तलाश करते हुए भी दिखे. स्टेशन पर मौजूद पनशाला में पानी पीने के लिए लोगों की भीड़ जमी थी. वहीं आंदोलन स्थल पर खीरा और चना बेचने वालों के सामने भी भीड़ जुटी रही. आंदोलन का पहला दिन होने के कारण दिन में खाना नहीं बनाया गया था. आदिवासी कुड़मी समाज की ओर से आयोजित रेल व सड़क जाम आंदोलन के लिए कोटशिला में सुबह से ही लोगों का पहुंचना शुरू हो गया था. कई आंदोलनकारी झंडा बैनर लिए रेल की पटरी पर बैठे थे, तो कई गमछा बिछा कर पटरी पर ही लेट गए थे. दोपहर तक बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हो चुके थे. दोपहर दो बजे समाज के मूल मानता अजीत महतो भी कोटशिला जंक्शन पहुंचे थे. उनके आने के बाद आंदोलन स्थल पर लोगों का उत्साह देखते ही बन रहा था.
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