Chandil (Dilip Kumar) : आषाढ़ शुक्ल द्वितीय के दिन निकाले जाने वाली रथ यात्रा चांडिल में
धुमधाम से मनाई जाती
है. चांडिल में निकाले जाने वाला रथ यात्रा पूरे क्षेत्र में विख्यात
है. रथ यात्रा में शामिल होने यहां दूर-दराज से लोग पहुंचते
हैं. इस रथ यात्रा की सबसे खास बात है कि यहां नागा
संन्यासियों द्वारा रथ यात्रा का आयोजन किया जाता
है. वैसे तो चांडिल स्थित
श्रीसाधु बांध मठिया
दशनामी नागा
सन्यासी आश्रम से निकाले जाने वाला रथ यात्रा अंग्रेजी शासन के समय शुरू हुआ था, लेकिन रथ यात्रा को नई पहचान मठ के ब्रह्मलीन महंत परमानंद सरस्वती ने दिलाई
थी. उन्होंने वर्ष 1980 से तीन अलग-अलग रथों पर प्रभु जगन्नाथ,
बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा का रथ यात्रा निकालने की परंपरा शुरू
की. इसके पूर्व एक ही रथ पर सवार होकर महाप्रभु अपने
बड़े भाई और बहन के साथ
मौसीबाड़ी जाते
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चांडिल में रथ यात्रा को लेकर तैयारियां जोरों पर चल रही
है. रथों को मरम्मत करने के साथ रंग रोगन का काम जोर-शोर से चल रहा
है. रथ यात्रा के लिए चार जून को स्नान उत्सव मनाया
जाएगा. चांडिल स्थित
श्रीसाधु बाध मठिया नागा
संनयासी आश्रम में रथ यात्रा को लेकर व्यापक स्तर पर तैयारी की जा रही
है. स्नान यात्रा को लेकर भी यहां तैयारियां जोरों पर
है. स्नान यात्रा के दिन मठिया मठ में
बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और महाप्रभु की पूजा-अचर्ना कर महाप्रसाद ग्रहण करते
हैं. इसकी जानकारी देते हुए महंत
इंद्रानंद सरस्वती ने बताया कि वर्षो से चली आ रही परंपरा को जूना
अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष
श्रीमहंत विद्यानंद सरस्वती ने नया
मुकाम दिया
है. उन्होंने एक रथ को लोहे का बनवाकर उसे मजबूत बनाने का काम किया
है. महंत ने बताया कि धीरे-धीरे तीनों रथों को लोहे का बनवाया जाएगा, जिसपर ब्रेक भी लगे
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स्नान यात्रा उत्सव के दौरान महाप्रभु , बड़े भाई बलभद्र, बहन सुभद्रा और सुदर्शन जी को 108
घड़े के पानी से स्नान कराया
जाएगा. महाप्रभु जगन्नाथ को 35 घड़े,
बड़ भाई बलदेव को 33, देवी सुभद्रा को 22 और सुदर्शन जी को 18 इस तरह कुल 108
घड़े जल से विग्रहों को स्नान कराया
जाएगा. जेष्ठ पूर्णिमा के दिन मनाए जाने वाले स्नान यात्रा उत्सव के दौरान शीतल जल से स्नान करने के कारण महाप्रभु बीमार
पड़ जाते
हैं. स्नान यात्रा के बाद बीमार
पड़ने पर महाप्रभु को एकांतवास में रखा जाता
है. इस दौरान उनका इलाज जड़ी-बूटी से दवा आदि बनाकर किया जाता
है. दो सप्ताह तक एकांतवास में रहकर इलाज कराने के बाद महाप्रभु
स्वस्थ्य होते
हैं. इस अवसर पर नेत्र उत्सव मनाया जाता
है. इसके बाद महाप्रभु की रथ यात्रा निकाली जाती
है. इस वर्ष 20 जून को रथ यात्रा निकाली
जाएगी. [wpse_comments_template]
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