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Chandil :  ईचागढ़ में चुनाव प्रचार के अंतिम दिन सभी  प्रत्‍याशियों ने झोंकी पूरी ताकत

Dilip Kumar
Chandil (Seraikela-Kharsawan) : झारखंड विधानसभा">https://lagatar.in/all-booths-will-be-monitored-through-cctv-in-assembly-elections-k-ravi-kumar/">विधानसभा

चुनाव
के पहले चरण में ईचागढ़ विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र में 13 नवंबर को वोट डाले जाएंगे. चुनाव प्रचार के लिए सोमवार का दिन आखिरी है. चुनाव प्रचार के अंतिम दिन सभी प्रत्याशी अपना पूरा दम-खम लगा रहे हैं. चुनाव प्रचार के अंतिम दिन इंडिया गठबंधन के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन नीमडीह प्रखंड में और एनडीए गठबंधन के लिए आजसू पार्टी के सुप्रीमो सुदेश महतो चुनाव प्रचार करेंगे. वहीं जेएलकेएम बाईक रैली निकालकर समर्थन जुटाएंगा. निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने वाले पूर्व विधायक अरविंद कुमार सिंह, खगेन महतो और सुखराम हेम्ब्रम भी चुनाव प्रचार के अंतिम दिन कोई कोर कसर बाकी नहीं रखना चाह रहे हैं. वैसे सभी मंगलवार को भी घर-घर पहुंचकर अपना समर्थन जुटाएंगे. सभी अपना एजेंडा बताकर सर्वांगीण विकास की बात कर रहे हैं.

विरासत बचाने की लड़ाई

ईचागढ़ विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र में मुकाबला रोचक मोड़ पर आ गया है. सभी उम्मीदवार इसे प्रतिष्ठा का विषय मानकर जीत सुनिश्चित करने के लिए एड़ी-चोटी एक कर रहे हैं. यहां इंडिया गठबंधन के उम्मीदवार सविता">https://lagatar.in/chandil-mla-savita-mahato-raised-the-issue-of-irrigation-problem-in-the-assembly/">सविता

महतो
के अलावा एनडीए से हरेलाल महतो, जेएलकेएम से तरुण महतो, निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में पूर्व विधायक अरविंद कुमार सिंह, सुखराम हेम्ब्रम, खगेन महतो समेत कुल 23 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं. इनमें अरविंद कुमार सिंह भाजपा से बागी होकर और सुखराम हेम्ब्रम झामुमो से बागी होकर चुनाव मैदान में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. बताया जा रहा है कि अरविंद कुमार सिंह अपनी खोयी राजनीतिक विरासत को वापस पाने के लिए तो सुखराम हेम्ब्रम ईचागढ़ को राजनीतिक रूप से आजाद कराने के लिए बागी होकर चुनाव लड़ रहे हैं.

हरेलाल और तरुण महतो बता रहे स्वाभिमान की लड़ाई

एनडीए उम्मीदवार हरेलाल महतो और जेएलकेएम">https://lagatar.in/will-jlkm-be-able-to-make-a-dent-in-the-votes-of-ajsu-jmm-as-well-as-congress-and-bjp/">जेएलकेएम

उम्मीदवार तरुण महतो इसे ईचागढ़ के लोगों के स्वाभिमान की लड़ाई बता रहे हैं. बीते 35 वर्षों से ईचागढ़ की राजनीतिक बागडोर दूसरे विधानसभा क्षेत्र के लोगों के हाथों में हैं. उनका कहना है कि यह एक प्रकार की राजनीतिक गुलामी है और यह चुनाव वास्तव में ईचागढ़ के राजनीतिक आजादी की लड़ाई है. ईचागढ़ को बाहरी लोगों के चंगुल से मुक्त कराकर इसकी बागडोर ईचागढ़ के भूमिपुत्र के हाथों में सौंपने दोनों ही प्रत्याशी लोगों को जागरूक कर रहे हैं. वैसे चुनाव लड़ने वाले अन्य स्थानीय निर्दलीय उम्मीदवार भी ईचागढ़ की विरासत को बचाने के लिए चुनाव लड़ने की बात कह रहे हैं. उम्मीदवारों का कहना है कि वे ईचागढ़ की बागडोर ईचागढ़ में ही रखने के पक्षधर हैं. सभी जनता को इसके लिए जागरूक होने की अपील कर रहे हैं. इसे भी पढ़ें : प्रधानमंत्री">https://lagatar.in/prime-minister-narendra-modi-said-thank-you-ranchi-to-the-people-of-ranchi/">प्रधानमंत्री

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