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चांडिल : रहिन पर्व पर खेतों में डाला गया बीज व गोबर का घेरा लगाकर बांधा गया घर

Chandil (Dilip Kumar) : चांडिल अनुमंडल क्षेत्र में रविवार को रहिन पर्व पांरपरिक विधि-विधान व हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है. रहिन के अवसर पर रविवार को पौ फटने से पहले ही घरों एवं चहारदिवारी के चारों और गोबर की लकीर से रहिन की धाइर-बेढ़ि दिया गया. यानि गोबर से घर के चारों और सुरक्षा लकीर खींचा गया. इसे बोलचाल की भाषा में घर बांधना कहा जाता है. इसकी धारणा ऐसी है कि गोबर के इस लकीर से होकर किसी प्रकार के विषैला जीव-जंतु, कीड़े-मकौड़े घर के अंदर प्रवेश नहीं कर सकता. वहीं सोकर उठने पर रहिन दाग को लांघ कर बाहर निकलने से उस दिन से घर के लोगों पर किसी दुर्घटना का प्रकोप नहीं हो सकता है. इसे भी पढ़ें :चाईबासा">https://lagatar.in/chaibasa-bjps-thinking-about-scheduled-caste-tribe-distorted-congress/">चाईबासा

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खेत से रहिन माटी लाने का रिवाज

[caption id="attachment_650990" align="aligncenter" width="150"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/05/rhin-parw-150x150.jpg"

alt="" width="150" height="150" /> इस प्रकार घर पर लगाते है गोबर का घेरा.[/caption] रहिन पर्व के अवसर पर रविवार को किसानों ने प्रकृति की वंदना करने के साथ खेतों में बीजारोपण कर कृषि कार्य का शुभारंभ किया. जेठ महीने के तेरहवें दिन से सात दिन तक मनाया जानेवाला रहिन परब झारखंडी संस्कृति का एक विशिष्ट परब है. इसे बिहिन पुन्हा भी कहते हैं. सुबह घर का मुखिया या उनका बड़ा पुत्र स्नान कर नौ मुट्ठी धान निकालकर गुंड़ि सिंदूर लगाए गए टोकरी या कांसे का पात्र में भर कर मौन धारण करके अपने खेतों में गए. वहां पहले से जोते हुए खेत में ढाई मुट्ठी धान डालकर कृषि कार्य का शुभारंभ किया. शाम को अपने खेत से रहिन माटी लाने की विशेष परंपरा है. इस पवित्र रहिन माटी का वर्ष भर विभिन्न अनुष्ठानों में उपयोग किया जाता है. इसे भी पढ़ें :चाईबासा">https://lagatar.in/chaibasa-bjps-thinking-about-scheduled-caste-tribe-distorted-congress/">चाईबासा

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रहिन फल खाने की परंपरा

रहिन पर्व के दिन आसाड़ी या रहिन फल खाने का विशेष नियम है. बताया जाता है कि रहिन फल एंटीबायोटिक गुणों से भरपूर होता है, जिसे खाने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है. वहीं रहिन पर्व के अवसर पर चांडिल अनुमंडल क्षेत्र के विभिन्न स्थानों में रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है. चांडिल प्रखंड के साहेरबेड़ा और नीमडीह प्रखंड के लाकड़ी में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में लोग उमड़ते हैं. इसे भी पढ़ें :जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-bhagirathvanshi-mahashaheed-atmashanti-yagya-samiti-remembers-veer-savarkar/">जमशेदपुर

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