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खेत से रहिन माटी लाने का रिवाज
[caption id="attachment_650990" align="aligncenter" width="150"]alt="" width="150" height="150" /> इस प्रकार घर पर लगाते है गोबर का घेरा.[/caption] रहिन पर्व के अवसर पर रविवार को किसानों ने प्रकृति की वंदना करने के साथ खेतों में बीजारोपण कर कृषि कार्य का शुभारंभ किया. जेठ महीने के तेरहवें दिन से सात दिन तक मनाया जानेवाला रहिन परब झारखंडी संस्कृति का एक विशिष्ट परब है. इसे बिहिन पुन्हा भी कहते हैं. सुबह घर का मुखिया या उनका बड़ा पुत्र स्नान कर नौ मुट्ठी धान निकालकर गुंड़ि सिंदूर लगाए गए टोकरी या कांसे का पात्र में भर कर मौन धारण करके अपने खेतों में गए. वहां पहले से जोते हुए खेत में ढाई मुट्ठी धान डालकर कृषि कार्य का शुभारंभ किया. शाम को अपने खेत से रहिन माटी लाने की विशेष परंपरा है. इस पवित्र रहिन माटी का वर्ष भर विभिन्न अनुष्ठानों में उपयोग किया जाता है. इसे भी पढ़ें :चाईबासा">https://lagatar.in/chaibasa-bjps-thinking-about-scheduled-caste-tribe-distorted-congress/">चाईबासा
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रहिन फल खाने की परंपरा
रहिन पर्व के दिन आसाड़ी या रहिन फल खाने का विशेष नियम है. बताया जाता है कि रहिन फल एंटीबायोटिक गुणों से भरपूर होता है, जिसे खाने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है. वहीं रहिन पर्व के अवसर पर चांडिल अनुमंडल क्षेत्र के विभिन्न स्थानों में रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है. चांडिल प्रखंड के साहेरबेड़ा और नीमडीह प्रखंड के लाकड़ी में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में लोग उमड़ते हैं. इसे भी पढ़ें :जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-bhagirathvanshi-mahashaheed-atmashanti-yagya-samiti-remembers-veer-savarkar/">जमशेदपुर: भागीरथवंशी महाशहीद आत्मशांति यज्ञ समिति ने वीर सावरकर को किया याद [wpse_comments_template]
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