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चांडिल : बंगाली समुदाय के लोगों ने पोइला बैशाख मनाया धूमधाम से

Chandil (Dilip Kumar) : पोइला बैशाख बंगाली नववर्ष का प्रतीक है, जिसे धूमधाम के साथ मनाया जाता है. इसे पश्चिम बंगाल के अलावा झारखंड में भी बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है. इस शुभ दिन पर लोग नए कारोबार शुरू करते हैं और खरीदारी भी करते हैं. बंगाली समाज के लोग पारंपरिक पोशाक पहन कर सुबह मंदिरों में पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं. चांडिल अनुमंडल क्षेत्र में भी बांग्ला नववर्ष हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है. बंगाली नव वर्ष पोइला बैसाख 15 अप्रैल को मनाया जाता है. यह बैशाख महीने का पहला दिन होता है. पोइला का अर्थ है पहला और बैशाख हिंदू वैदिक सौर मास पर आधारित बंगाली कैलेंडर का पहला महीना है. इसे भी पढ़ें :चक्रधरपुर">https://lagatar.in/chakradharpur-only-one-chapakal-on-a-population-of-250-villagers-forced-to-drink-chuan-water/">चक्रधरपुर

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पोइला वैशाख पर मनाए जाने वाली रीतियां

बंगाली समाज में बैशाख का पूरा महीना शुभ माना जाता है. पोइला बैशाख पर लोग अपने घरों की साफ-सफाई करते हैं. लोग इस दिन अधिकतर समय पूजा-पाठ और रिश्तेदारों व दोस्तों से मिलने-जुलने में लगाते हैं. इस अवसर पर घरों में खास पकवान बनाए जाते हैं. घर में छोटे-बड़ों के पैर छूते हैं और घर के बाहर भी मिठाई लेकर बड़ों के पैर छुकर आर्शीवाद लेने की परंपरा है. इस अवसर पर लोग भगवान गणेश और देवी लक्ष्मी की पूजा करते हैं. व्यापारी लोग इस दिन नया बहीखाता बनाते हैं जिसे हालखाता के नाम से जाना जाता है. पूजा के बाद ही इसमें हिसाब लिखना शुरू होता है. अलग-अलग स्थानों में जुलूस निकाला जाता है, मेला लगता है और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है. इसे भी पढ़ें :जमशेदपुर">https://lagatar.in/jharkhand-revival-campaign-opposes-chaibasa-bypass-road/">जमशेदपुर

: बंगाली समुदाय ने उत्साह व उल्लास के साथ मनाया बांग्ला नव वर्ष पोइला बोइशाख

खास है बंगाली नये साल का महत्व

बंगाली समाज के लिए नए साल का बड़ा ही खास महत्व है. खासतौर पर शादी-ब्याह के मद्देनजर बैशाख का पूरा महीना शुभ माना जाता है. पोइला बैसाख के दिन नए काम की शुरुआत करना शुभ माना जाता है. इस सबके अलावा पोइला बैशाख का मुख्य आकर्षण पारंपरिक बंगाली व्यंजनों की थाली होती है. थाली में बंगाली व्यंजनों के अलावा विभिन्न प्रकार की मिठाई की प्रधानता होती है. लोग एक-दूसरे को भोजन के लिए अपने घर पर बुलाते हैं. इसे भी पढ़ें :चाईबासा">https://lagatar.in/jharkhand-revival-campaign-opposes-chaibasa-bypass-road/">चाईबासा

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