Chandil (Dilip Kumar) : सिंहभूम कॉलेज चांडिल के कक्ष संख्या एक में मंगलवार को रेगुलेशन फॉर कोर्स करिकुलम, क्रेडिट फ्रेमवर्क एंड एग्जामिनेशन्स फॉर फोर ईयर अंडर ग्रेजुएट प्रोग्राम इन कोल्हान यूनिवर्सिटी चाईबासा, झारखंड अंडर न्यू एजुकेशन पॉलिसी 2020 विषय पर नेशनल वर्कशॉप का आयोजन किया गया. इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित कोल्हान विश्विद्यालय के एनईपी को-ऑर्डिनेटर डॉ प्रभात कुमार पाणी ने कहा कि विद्यार्थी अब यूजी पाठ्यक्रम के अंतर्गत कुछ शर्तों के आधार पर 5 तरह की डिग्री प्राप्त कर सकेंगे. चार वर्षीय पाठ्यक्रम के प्रथम वर्ष तक पढ़ाई करने के बाद सर्टिफिकेट कोर्स प्राप्त कर सकेंगे जबकि दूसरे वर्ष पढ़ाई पूरी करने के बाद डिप्लोमा की डिग्री प्राप्त कर सकेंगे. तीन साल के बाद विद्यार्थियों को डिग्री की उपाधि मिल सकेगी. तीसरे वर्ष में जिन विद्यार्थियों को 75 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त होंगे उन्हीं को चौथे साल में डिग्री ऑनर्स विथ रिसर्च प्रोग्राम में एडमिशन मिल सकेगा. ऐसे विद्यार्थियों को पीजी करने की जरूरत नहीं होगी. वह सीधे पीएचडी में दाखिला ले सकेंगे. जिन विद्यार्थियों का 75 प्रतिशत से कम अंक होगा, उन्हें चौथे वर्ष में डिग्री विथ ऑनर्स के तहत पढ़ाई करनी होगी. डिग्री विद ऑनर्स वाले विद्यार्थियों को एक साल का पीजी करने का प्रावधान है.
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नए पाठ्यक्रम में सर्टिफिकेट, डिप्लोमा, डिग्री, डिग्री विथ ऑनर्स, डिग्री ऑनर्स विथ रिसर्च नाम के पांच कोर्स उपलब्ध है. उन्होंने कहा कि प्रथम सेमेस्टर में कुल 6 पेपर होंगें फर्स्ट सेमेस्टर के लेंग्वेज एंड कम्यूनिकेशन स्किल्स नामक प्रथम पत्र में सभी विद्यार्थियों को हिंदी पढ़ना अनिवार्य होगा. वेल्यू एडेड कोर्स नामक दूसरे पत्र में दो भाग हैं. इसमें अंडरस्टैंडिंग इंडिया नामक पत्र सभी को पढ़ना होगा, जबकि दूसरे भाग में पर्यावरण विज्ञान एवं योग में से कोई एक पत्र रखना होगा. तीसरे पत्र के रूप में स्किल एनहान्समेंट कोर्स के अंतर्गत विद्यार्थी डिजिटल एजुकेशन नामक पेपर पढ़ेंगे. चौथे पत्र में एमडीसी होगा. इसके अंतर्गत विद्यार्थी वैसे विषय को रखेंगे जो इंटर में नहीं पढ़ा है. इसके बाद मेजर पेपर होगा जो पहले ऑनर्स होता था. इसके अंतर्गत विद्यार्थी वहीं पेपर रख सकेंगे जो इंटर में पढ़ा था. इसके अलावा एक माइनर पेपर होगा, वह भी इंटर में पढ़ा हुआ विषय होना जरुरी है. प्रथम सेमेस्टर में कुल 20 क्रेडिट होगा. थियोरी विषयों के एक क्रेडिट 15 घंटे के पढ़ाई के बराबर होगा, जबकि प्रैक्टिकल विषयों के एक क्रेडिट 30 घंटे के पढ़ाई के बराबर होगा.
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डॉ पाणी ने कहा कि प्रथम, तृतीय पंचम और सप्तम समसत्र की पढ़ाई जुलाई से दिसंबर तक होगी. जबकि द्वितीय, चतुर्थ, षष्ठ और अष्टम समसत्र की पढ़ाई जनवरी से जून तक होगी. संपूर्ण यूजी पाठ्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थी कुल 160 क्रेडिट का अध्ययन करेंगे. उन्होंने कहा कि प्रत्येक मेजर पेपर के लिए एक बास्केट होगा, जिसके अंतर्गत कई सारे विषयों को रखा गया है. उन्हीं में से विद्यार्थी माइनर और एमडीसी पेपर रखेंगे. यह भी तभी संभव है जब उस विषय की उस कॉलेज में पढ़ाई होती हो.
शिक्षकों ने कई तरह के प्रश्न पूछे
मुख्य वक्ता ने पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से नये पाठ्यक्रम के विभिन्न पक्षों को विद्यार्थियों के सामने सरल भाषा में प्रस्तुत किया. शिक्षकों शिक्षकेत्तर कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों से खचाखच भरे हॉल में शिक्षकों ने कई तरह के प्रश्न पूछे. मुख्य वक्ता डॉ पाणी ने इन प्रश्नों के उत्तर को उदाहरण के साथ स्पष्ट किया. इस कार्यक्रम में प्रथम समसत्र के बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे. इससे पहले कार्यक्रम की शुरुआत डॉ सुनील मुर्मू के मंगलाचरण पाठ से शुरू हुआ. महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ सरोज कुमार कैवर्त्त ने स्वागत एवं अभिनंदन उद्बोधन रखा. कार्यक्रम का संचालन वर्कशॉप के संयोजक डॉ सुनील मुर्मू ने किया. जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ संजय कुमार ने किया.
यह रहे मौजूद
इस कार्यक्रम में डिग्री कॉलेज सरायकेला खरसावां के प्राचार्य मो मुस्ताख अहमद, कॉलेज के डॉ जेके सिंह, डॉ सुधीर कुमार सिंह, प्रो. एके गोराई , डॉ. आरआर राकेश, प्रो.बीए मिंज, डॉ अंबिका रजक, प्रो रिया शालिनी, डॉ नीलम , डॉ मृदुला सिन्हा, डॉ नेपाल महतो, डॉ प्रभास गोराई आदि प्रमुख रूप से उपस्थित थे. कार्यक्रम को सफल बनाने में एनसीसी कैडेट्स एवं तकनीकी दल के सुबोध एवं विभीषण का विशेष योगदान रहा. [wpse_comments_template]
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