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दलमा राजा ने मांगी मन्नत
[caption id="attachment_624348" align="aligncenter" width="600"]alt="" width="600" height="400" /> सेंदरा के लिए तैयार सेंदरा वीर.[/caption] वहीं दूसरी ओर फदलोगोड़ा में दलमा पहाड़ की तलहटी पर दलमा राजा राकेश हेंब्रम ने पारंपरिक तरीके से वन के देवी-देवताओं का आह्वान किया. उन्होंने वन में प्रवेश व शिकार खेलने का अनुमति मांगने के साथ सेंदरा वीरों की सुरक्षा की कामना की. सेंदरा पूजा के दौरान पारंपरिक तीर-धनुष, फरसा, कुल्हाड़ी, तलवार समेत अन्य पारंपरिक अस्त्र-शस्त्र व वाद्य यंत्रों की भी पूजा की गई. प्राचीन काल से चली आ रही प्रथा के अनुसार विशु सेंदरा जाने से पूर्व गांव के लोग हथियारों के साथ पूजा करते हैं और मन्नत मांगते हैं कि जंगल में अधिक से अधिक शिकार मिले और किसी प्रकार की क्षति व जोखिम न हो. इसे भी पढ़ें : नोवामुंडी">https://lagatar.in/noamundi-on-may-9-villagers-will-stage-a-sit-in-demonstration-demanding-jobs-for-the-ryots/">नोवामुंडी
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युवाओं को आगे आने की जरूरत : लाया
जामडीह के लाया सनातन पहाड़िया ने कहा कि अपनी गौरवशाली इतिहास को बचाए रखने के लिए युवाओं को आगे आने की जरूरत है. समाज में सेंदरा का उत्साह धीरे-धीरे कम होता जा रहा है. अधिकांश लोग सेंदरा में शिकार करने नहीं वरण परंपरा निभाने के लिए दलमा जाते हैं. उन्होंने बताया कि पूजा के दौरान समाज के लोगों ने सामूहिक रूप से सामाजिक एकता व अखंडता बना रहे, अन्याय व अत्याचार के खिलाफ लड़ने की ताकत मिले, समाज को विकास के पथ पर आगे ले जाने की शक्ति देने के लिए भी वन के देवी-देवताओं से प्रार्थना किया गया. उन्होंने बताया कि राजतंत्र के समय से दलमा शिकार के पूर्व जामडीह में पूजा-अर्चना कर वन के देवी-देवताओं से अनुमति मांगा जाता रहा है. इसे भी पढ़ें : जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-farewell-given-to-senior-gm-of-tata-motors-on-retirement/">जमशेदपुर: सेवानिवृति पर टाटा मोटर्स के सिनियर जीएम को दी गई विदाई

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