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चांडिल : सेंदरा वीरों ने की दलमा के देवी-देवताओं व हथियारों की पूजा

Chandil (Dilip Kumar) : देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना के साथ ही रविवार को सेंदरा पर्व का आगाज हो गया है. चांडिल प्रखंड के आसनबनी टोला जामडीह में परंपरा के अनुसार वन के देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना की गई. लाया यानी पुजारी सनातन पहाड़िया और हाप लाया देवेन कर्मकार ने पूजा की और जंगल में प्रवेश कर शिकार खेलने की अनुमति मांगी. लाया ने देवी-देवताओं की पूजा कर अच्छी बारिश, अच्छी उपज, स्वच्छ पर्यावरण, महामारी से रक्षा व सभी की खुशहाली के लिए प्रार्थना किया. दलमा बुरू दिशुवा सेंदरा समिति के अध्यक्ष फकीर चंद्र सोरेन, मनसा राम मांझी, बुद्धेश्वर सिंह, रूहीदास मांझी, रमेश लोहार, सुकलाल पहाड़िया, सत्यनारायण मुर्मू, लखन मुर्मू, गौरा पहाड़िया समेत बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे. इसे भी पढ़ें : चांडिल">https://lagatar.in/chandil-one-arrested-with-stolen-bike-went-to-jail/">चांडिल

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दलमा राजा ने मांगी मन्नत

[caption id="attachment_624348" align="aligncenter" width="600"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/04/Chandil-Sendra-1-1.jpg"

alt="" width="600" height="400" /> सेंदरा के लिए तैयार सेंदरा वीर.[/caption] वहीं दूसरी ओर फदलोगोड़ा में दलमा पहाड़ की तलहटी पर दलमा राजा राकेश हेंब्रम ने पारंपरिक तरीके से वन के देवी-देवताओं का आह्वान किया. उन्होंने वन में प्रवेश व शिकार खेलने का अनुमति मांगने के साथ सेंदरा वीरों की सुरक्षा की कामना की. सेंदरा पूजा के दौरान पारंपरिक तीर-धनुष, फरसा, कुल्हाड़ी, तलवार समेत अन्य पारंपरिक अस्त्र-शस्त्र व वाद्य यंत्रों की भी पूजा की गई. प्राचीन काल से चली आ रही प्रथा के अनुसार विशु सेंदरा जाने से पूर्व गांव के लोग हथियारों के साथ पूजा करते हैं और मन्नत मांगते हैं कि जंगल में अधिक से अधिक शिकार मिले और किसी प्रकार की क्षति व जोखिम न हो. इसे भी पढ़ें : नोवामुंडी">https://lagatar.in/noamundi-on-may-9-villagers-will-stage-a-sit-in-demonstration-demanding-jobs-for-the-ryots/">नोवामुंडी

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युवाओं को आगे आने की जरूरत : लाया

जामडीह के लाया सनातन पहाड़िया ने कहा कि अपनी गौरवशाली इतिहास को बचाए रखने के लिए युवाओं को आगे आने की जरूरत है. समाज में सेंदरा का उत्साह धीरे-धीरे कम होता जा रहा है. अधिकांश लोग सेंदरा में शिकार करने नहीं वरण परंपरा निभाने के लिए दलमा जाते हैं. उन्होंने बताया कि पूजा के दौरान समाज के लोगों ने सामूहिक रूप से सामाजिक एकता व अखंडता बना रहे, अन्याय व अत्याचार के खिलाफ लड़ने की ताकत मिले, समाज को विकास के पथ पर आगे ले जाने की शक्ति देने के लिए भी वन के देवी-देवताओं से प्रार्थना किया गया. उन्होंने बताया कि राजतंत्र के समय से दलमा शिकार के पूर्व जामडीह में पूजा-अर्चना कर वन के देवी-देवताओं से अनुमति मांगा जाता रहा है. इसे भी पढ़ें : जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-farewell-given-to-senior-gm-of-tata-motors-on-retirement/">जमशेदपुर

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सोमवार तड़के कूच करेंगे दलमा

दिशुवा शिकार के लिए विभिन्न स्थानों से सेंदरा वीर दलमा के तलहटी पर पहुंचने लगे हैं. सेंदरा में पारंपरिक हथियारों के साथ झारखंड के विभिन्न स्थानों के अलावा पश्चिम बंगाल और ओड़िशा से भी सेंदरा वीर दलमा पहुंचते हैं. सेंदरा वीर सोमवार को तड़के सेंदरा के लिए दलमा के घने जंगलों में कूच करेंगे. कई सेंदरा वीर रविवार को पूजा में भी शामिल हुए. पारंपरिक हथियारों से लैस सेंदरा वीर सोमवार को सुबह चार बजे दलमा जंगल पर चढ़ाई करेंगे. दलमा में वे परंपरा के अनुसार जंगली जानवरों का सेंदरा करेंगे. दिन भर शिकार करने के बाद शाम तक शिकार किए गए जानवरों को लेकर वापस लौटेंगे. वहीं दूसरी ओर बताया जा रहा है कि कई सेंदरा वीर रविवार को ही दलमा के जंगलों में प्रवेश कर गए हैं. [wpse_comments_template]

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