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चांडिल : षष्ठी के दिन नहीं जले चूल्हे, सिलबट्टे की हुई पूजा

  • अनुमंडल क्षेत्र के गांव-गांव में मना बासी भात का महापर्व
Chandil (Dilip Kumar) : चांडिल अनुमंडल क्षेत्र में गुरुवार को बसंत षष्ठी के दिन बासी भात का महापर्व धूमधाम के साथ मनाया गया. बासी भात के दिन विशेष प्रकार का पकवान बनाया जाता हे, जिसे सीजानो कहते हैं, इसलिए इसे सीजानो पर्व भी कहा जाता है. सीजानो के मौके पर माता शीतला की पूजा की जाती है. इसलिए इसे शीतला षष्ठी भी कहा जाता है. इस दिन श्रद्धालु बासी भोजन करते हैं. इसे भी पढ़ें : सरकार">https://lagatar.in/government-is-yours-we-are-with-you-in-every-step-cm/">सरकार

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नौ प्रकार के गोटा दाल व सब्जी के मिश्रण (सीजानो) एवं ठंडा भात माता शीतल षष्ठी को अर्पण के बाद बासी भोजन ग्रहण किया गया. पश्चिम बंगाल और ओडिशा से सटे कोल्हान क्षेत्र में बसंत षष्ठी की पूजा धूमधाम से की जाती है. हर क्षेत्र की अलग-अलग मान्यता और परंपराएं है, उन्हीं में से एक परंपरा बसंत षष्ठी के दिन मनाया जाने वाला सीजानो पर्व है. इसे भी पढ़ें : नोवामुंडी">https://lagatar.in/noamundi-girl-commits-suicide-by-hanging-herself-from-a-tree/">नोवामुंडी

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नौ प्रकार के दाल व सब्जी का मिश्रण सीजानो 

सीजानो यानी गोटा सिद्धो में नौ प्रकार के दाल व सब्जी का मिश्रण होता है. बसंत पंचमी की रात सीजानो बनाने के साथ ही घर का चूल्हा बंद कर दिया जाता है. इसके बाद सप्तमी के दिन घर का चूल्हा जलाया जाता है. परिवार में से कोई व्रती सीजानो बनाता या बनाती है. सीजानो बनाने के लिए राजमा, कुल्थी, बिरी, चना, बेर, सेम, मुनगा फूल और कचु मिलाया जाता है. इसे भी पढ़ें : नोवामुंडी">https://lagatar.in/noamundi-girl-commits-suicide-by-hanging-herself-from-a-tree/">नोवामुंडी

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सिल लोढ़ा (सिलबट्टा) रखकर किए जाने वाले षष्ठी पूजा में भी विशेष प्रकार का प्रसाद चढ़ाया जाता है. आठ कलाई (आठ प्रकार के भुंजा), मीठा और पीठा देकर पूजा किया जाता है. क्षेत्र विशेष पर सीजानो मनाने का तरीका अलग-अलग है. कुछ लोग सीजानो में मछली बनाते हैं, जबकि कुछ लोग इस पूजा में शाकाहारी खाना बनाते हैं. इसे भी पढ़ें : रांचीः">https://lagatar.in/jmms-fast-against-center-and-bjp/">रांचीः

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नहीं जले चूल्हे, हुई पूजा

शीतला षष्ठी के दिन लोग चूल्हा नहीं जलाते हैं, बल्कि चूल्हे की पूजा करते हैं. गुरुवार को क्षेत्र में बासी भात मनाने वालों के घर चूल्हे नहीं जले. इस अवसर पर सुबह विधि-विधान के साथ घरों में सील लोढ़ा (सिलबट्टे) और चूल्हे की पूजा की गई. षष्ठी का व्रत माघ माह में शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को शीतला माता के नाम से किया जाता है. यह व्रत परिवार की सुख समृद्धि, पुत्र प्रदान करने वाला एवं सौभाग्य देने वाला है. पुत्री की इच्छा रखने वाली महिलाओं के लिए यह व्रत उत्तम माना गया है. मान्यता के अनुसार इस तिथि को व्रत करने से जहां तन मन शीतल रहता है, वहीं चेचक से भी लोग मुक्त रहते हैं. इसे भी पढ़ें : PM">https://lagatar.in/prime-minister-modi-said-india-qatar-relations-are-continuously-strengthening-meeting-with-the-amir-was-wonderful/">PM

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आदित्यपुर : केंद्र की मोदी सरकार किसान मजदूर विरोधी : राकेश्वर

  • भारत बंद के आह्वान पर निकाली गई मशाल जुलूस
  • कानूनों में बदलाव कर हकमारी कर रही है सरकार
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alt="" width="600" height="400" /> Adityapur (Sanjeev Mehta)केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार किसान और मजदूर विरोधी,ल है. किसान और मजदूरों के लिए पूर्व में बनाए गए कानूनों में बदलाव कर उनकी हकमारी कर रही है, उनके अधिकारों का हनन कर रही है. उक्त बातें गुरुवार की शाम मशाल जुलूस निकालकर इंटक के प्रदेश अध्यक्ष राकेश्वर पांडेय ने आदित्यपुर में कही. बता दें कि देशभर के किसान और मजदूर संगठनों ने 16 फरवरी को नरेंद्र मोदी के इस कृत्य के विरोध में भारत बंद का आह्वान किया है. इसे भी पढ़ें : नोवामुंडी">https://lagatar.in/noamundi-girl-commits-suicide-by-hanging-herself-from-a-tree/">नोवामुंडी

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इसको लेकर आज किसान संगठनो और विभिन्न ट्रेड यूनियनों के द्वारा कल भारत बन्द बुलाये जाने को सफल बनाने को लेकर इंटक जिलाध्यक्ष केपी तैयारी के नेतृत्व में मशाल जुलूस निकाला गया और व्यवसासियों, दुकानदारों, तथा आम लोगों से इस भारत बंद को सफल बनाने की अपील की है. इस मशाल जुलूस कार्यक्रम में एसयूसीआई की महिला नेत्री लिली दास, सुशील सिंह, देबू चटर्जी, राणा सिंह, कुंवर सुनील सिंह, विनोद राय, एके सिंह, मनमन सिंह, अम्बुज ठाकुर, विष्णुदेव गिरी, कमल नयन, मो. रिजवान, खिरोद सरदार, मीरा तिवारी, बीजू पोद्दार, कुश पोद्दार आदि शामिल रहे. इसे भी पढ़ें : नोवामुंडी">https://lagatar.in/noamundi-girl-commits-suicide-by-hanging-herself-from-a-tree/">नोवामुंडी

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