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चांडिल : विकास का एक रूप ऐसा भी, तेज हवा बहने से चारों ओर छा जाती है काली घटा

Chandil (Dilip Kumar) : झारखंड बनने के बाद चांडिल प्रखंड क्षेत्र में कल-कारखानों की बाढ़ सी आ गई. लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने और विकास करने की बात कर एक के बाद एक कंपनी स्थापित की गई. इनमें प्रदूषण फैलाने वाली स्पंज आयरन कंपनियों की संख्या भी काफी है. स्पंज आयरन कंपनियां आबादी के बीच स्थापित की गई है. वैसे लगभग आधे से अधिक कंपनियां नियम-कानून को ताक पर रखकर स्थापित किया गया है. कंपनी लगाने के लिए विद्यालय भवन, वन भूमि, नदी और आबादी को लेकर बनाए गए प्रावधानों को दरकिनार किया गया है. इन कंपनियों में लोगों को रोजगार तो मिला लेकिन मजदूर, चौकीदार, ऑफिस में पानी पिलाने की. ओहदे वाले पदों पर जमीन मालिक नहीं बैठ पाए. इसे भी पढ़ें :आदित्यपुर">https://lagatar.in/adityapur-strategy-made-to-solve-the-problem-of-water-supply-in-summer/">आदित्यपुर

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प्रदूषण के कारण त्राहिमाम कर रही जनता

क्षेत्र में स्थापित स्पंजय आयरन कंपनियों से होने वाले प्रदूषण से लोग त्राहिमाम कर रहे है. चिमनियों से निकलने वाली काली धूल तो रोज का मामला है, हल्की सी हवा बहने पर भी कंपनियों से उड़ने वाली काली धूल से चारों ओर अंधेरा छा जाता है. टाटा-रांची राष्ट्रीय राजमार्ग 33 के किनारे भी चांडिल प्रखंड क्षेत्र में कई कंपनियां स्थापित है. कंपनियों से उड़ने वाली धूलकण के कारण अंधेरा छाने पर सड़क पर वाहन चालकों को लाइट जलाकर वाहन चलाना पड़ता है. गर्मी के दिनों में और प्री मानसून के दौरान अमूमन तेज हवाएं बहती है. ऐसे में इन दिनों चांडिल क्षेत्र में लोगों को जीना मुहाल हो जाता है, दिन में ही रात का एहसास होने लगता है. कंपनियों से लौह आयस्क और कोयले का डस्ट लोगों को बीमारियों की चपेट में भी धकेल रहा है. इसे भी पढ़ें :चक्रधरपुर">https://lagatar.in/chakradharpur-special-prayers-held-in-the-citys-churches-on-easter-sunday/">चक्रधरपुर

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आंदोलन तो हुआ, पर नहीं निकला नतीजा

प्रदूषण के खिलाफ कई बार आंदोलन किया गया, लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि एक बार भी इस समस्या को लेकर किसी प्रकार का कोई नतीजा नहीं निकला. प्रदूषण तक भी जारी था और अब भी बदस्तूर जारी है. जनप्रतिनिधि हो या पदाधिकारी, राजनीतिक दलों के नेता या क्षेत्र के समाजसेवी सभी प्रदूषण की समस्या के आगे नतमस्तक हैं. प्रदूषण की समस्या को लेकर ग्रामीण भी आंदोलन किए, संगठनों ने भी सत्याग्रह किए. छोटे से लेकर बड़े-बड़े उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा गया. इस समस्या को लेकर कहीं से भी किसी प्रकार की सुनवाई नहीं हुई. इस संबंध में चांडिल निवासी नवीन पसारी ने कहा कि अब पता चल रहा है कि विकास का एक रूप ऐसा भी होता है. ऐसे विकास की किताब में एक अध्याय प्रदूषण का भी रहता है. उन्होंने संबंधित विभाग और स्थानिय जनप्रतिनिधियों से इस जानलेवा समस्या से लोगों को बचाने की गुहार लगाया है. इसे भी पढ़ें : [wpse_comments_template]  

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