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चांडिल : उधार की साइकिल से नेशनल चैंपियन बनने के सपने सजाए मुंबई रवाना हुआ सुंदर

Chandil (Dilip Kumar) : जिले के हुनरमंद खिलाड़ियों को नेशनल व अन्य चैंपियन बनने के लिए आर्थिक तंगी आड़े आ रही है. ग्रामांचलों के खिलाड़ियों को खेल संसाधन नहीं मिलने के कारण उनकी प्रतिभा कुंठित हो रही है. ऐसे में खिलाड़ी चाहकर भी अपने हुनर का प्रदर्शन नहीं कर पा रहे हैं. सरायकेला-खरसावां जिले के एक ऐसा ही खिलाड़ी आर्थिक तंगी के कारण अपनी प्रतिभा का सही प्रदर्शन बड़े मंचों पर नहीं कर पा रहा है. साइकिलिंग के नेशनल चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने के उनके सपने के बीच उनके परिवार की आर्थिक स्थिति हर बार आड़े आ रही है. उनकी इच्छा है कि वे नेशनल चैंपियनशिप में गोल्ड जीते, पूरे देश में अपने राज्य और जिले का नपाम रौशन करें, लेकिन उनके परिवार की आर्थिक तंगी उनकी मजबूरी बन जा रही है. इसे भी पढ़ें : जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-national-security-advisor-has-sent-a-letter-to-the-states-directing-them-to-stop-the-illegal-trade-of-drugs/">जमशेदपुर

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शिरडी में छह से दस जनवरी तक होगा चैंपियनशिप

सरायकेला-खरसावां जिले के राजनगर प्रखंड के सुदूरवर्ती गांव राजाबासा के रहने वाला सुंदर मुर्मू एक बेहतरीन साइकिलिस्ट है. वह गढ़वा में हुए राज्यस्तरीय चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीतकर नेशनल चैंपियनशिप के लिए क्वालिफाई कर चूका है. इसके बाद सुंदर मुर्मू हमेशा से महाराष्ट्र के शिरडी में छह से दस जनवरी तक होने वाले 27वां नेशनल रोड रेस चैंपियनशिप में शामिल होकर गोल्ड जीतने का सपना देखता रहा. लेकिन सपनों की दुनिया से जब भी वह बाहर निकलता था, उसकी आंखे नम हो जाती थी. जिसका एकमात्र कारण परिवार की आर्थिक तंगी है. नेशनल चैंपियनशिप में शामिल होने के लिए उसके पास साइकिल नहीं है.

उधार की साइकिल मांग कर मुंबई गया सुंदर

सुंदर मुर्मू की दृढ़ इच्छाशक्ति को देखते हुए सरायकेला-खरसावां जिला साइकिलिंग एसोसिएशन के महासचिव दिलीप कुमार गुप्ता ने उसे चैंपियनशिप में शामिल होने के लिए अपनी साइकिल दी. डेढ़ लाख कीमत वाली साइकिल में 12 गियर है. वहीं उधार की साइकिल से नेशनल चैंपियन बनने के सपने सजाए सुंदर मुर्मू मंगलवार को चौका से मुंबई के लिए रवाना हुआ. सुंदर चौका से रांची और रांची से बरकाखाना पहुंचेगा. इसके बाद झारखंड के 30 सदस्यीय दल के साथ ट्रेन से मुंबई जाएगा. इसे भी पढ़ें : मनोहरपुर">https://lagatar.in/manoharpur-police-pasted-advertisement-at-the-house-of-accused-of-saranda-naxalite-incident/">मनोहरपुर

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तीन बार नेशनल चैंपियनशिप में शामिल हो चुका सुंदर

इसके पहले भी सुंदर तीन बार नेशनल चैंपियनशिप में भाग ले चूका है. तक वह सरायकेला-खरसावां जिले से नहीं बल्कि जमशेदपुर की ओर से चैंपियनशिप में शामिल हुआ था. तीनों बार उन्होंने अपने एक सहयोगी नरवा के दामुडीह के रहने वाले लखन हांसदा से साइकिल मांगकर चैंपियनशिप में शामिल हुआ था. तीनों बार मेडल नहीं ले पाने के संबंध में सुंदर ने बताया कि इसका सबसे बड़ा कारण उक्त साइकिल से प्रैक्टिस नहीं कर पाना. चैंपियनशिप के दौरान उसे डर लगा रहता था कि कहीं साइकिल खराब ना हो जाए.

11 दिन की बेटी के लिए लेपा है मेडल

सुंदर मुर्मू अपनी 11 दिन की बेटी को छोड़कर मंगलवार को मुंबई के लिए रवाना हुआ. दरअसल जब वह राज्य स्तरीय चैंपियनशिप में खेल रहा था, उसी दौरान उनकी पत्नी ने पुत्री को जन्म दिया. पुत्री के जन्म लेने की खबर के साथ वह चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीता. अब वह बेटी के लिए गोल्ड मेडल लाना चाहता हैं. इसलिए परिवार में पत्नी और नवजात बेटी को छोड़र मुंबई रवाना हो गया है. सुंदर ने बताया कि उसके माता-पिता का निधन हो चूका है, अब उसकी एक बड़ी बहन है, जिसकी शादी हो चुकी है. नेशनल चैंपियनशिप में शामिल होने के लिए उसने साइकिल के लिए मंत्री से लेकर अधिकारियों से गुहार लगाई, लेकिन किसी ने उसकी मदद नहीं की. इसे भी पढ़ें : राजनगर">https://lagatar.in/rajnagar-nadep-tank-construction-work-started-in-mudiapada/">राजनगर

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दो खिलाड़ी नहीं गए शिरडी

महाराष्ट्र के शिरडी में आयोजित 27वां नेशनल रोड रेस चैंपियनशिप में शामिल होने के लिए जिले के तीन साइकिलिस्ट क्वालिफाई किए थे. इनमें दो खिलाड़ी हिंदू हांसदा और अखिलेश महतो साइकिल नहीं रहने के कारण चैंपियनशिप में शामिल होने नहीं जा पाए. हिंदू हांसदा राजनगर के राजाबासा गांव के और अखिलेश महतो खरसावां के छोटाबम्बू के रहने वाले हैं. आर्थिक तंगी के चलते डेढ़ से दो लाख रुपये की कार्बन साइकिल खरीदने की स्थिति में काई भी खिलाड़ी नहीं है. इसके कारण उनका स्वप्न अधूरा रह गया. दोनों खिलाड़ियों ने बताया कि परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी ना होने के कारण राज्य को स्वर्ण पदक दिलाने का उनका स्वप्न अधूरा रह जाएगा. उनकी इच्छा है कि प्रदेश व जिले का नाम रोशन करें लेकिन, परिवार की आर्थिक तंगी उनकी मजबूरी है. [wpse_comments_template]

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