Chakulia : चाकुलिया प्रखंड की सरडीहा पंचायत में पश्चिम बंगाल की सीमा से सटे गांव
मौराबांधी में इन दिनों करेले की फसल लहलहा रही
है. यहां के कई किसानों ने अपने बूते पर करेले की खेती की
है. उत्पादित करेले को किसान बिहार भेज रहे
हैं. इन दिनों 20-25 रुपए किलो की दर से करेले की बिक्री हो रही
है. प्रतिदिन 25-30 क्विंटल करेला पिकअप वैन से बिहार भेजा जा रहा
है. करेले की खरीदी के लिए बिहार के व्यापारी यहां आते
हैं. मौराबांधी गांव के किसानों ने लगभग 20 बीघा खेत में करेले की खेती की
है. किसानों ने अपने स्तर से
समरसेबल लगवाया
है. समरसेबल के पानी से खेत की सिंचाई करते
हैं. सिंचाई के लिए सरकारी सुविधाएं नगण्य
हैं. करेला की खेती करने वाले किसान जयंत बेरा, संजय पाल,
सनसी सबर, अर्जुन बेरा ने बताया कि वे प्रत्येक वर्ष इस मौसम में करेले की खेती करते
हैं. [caption id="attachment_575856" align="aligncenter" width="600"]

https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/03/Chakulia-Mourabandhi-1.jpg"
alt="" width="600" height="400" /> खेतों से तोड़ कर रखा गया करेला.[/caption]
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: स्थाई लोक अदालत में बैंक से जुड़े मामलों को हुआ निष्पादन किसानों की मेहनत से यह इलाका करेला उत्पादन में अपनी पहचान बना चुका है
एक बीघा करेले की खेती करने में करीब 35 हजार रुपये का खर्च आता
है. किसानों का कहना है कि अगर सरकार सिंचाई के बेहतर सुविधा उपलब्ध कराए तो वे और भी
बड़े पैमाने पर करेले की खेती कर स्वावलंबी बन सकते
हैं. फिलहाल जरूरत इस बात की है कि नियमित रूप से बिजली की आपूर्ति
हो. ताकि
समरसेबुल से खेत की सिंचाई समय पर हो
सके. जानकारी के मुताबिक इस पंचायत के अन्य कई गांव में भी किसान
बड़े पैमाने पर करेले की खेती करते
हैं. किसानों की मेहनत से पश्चिम बंगाल की सीमा से सटे यह इलाका करेला उत्पादन में अपनी एक अलग पहचान बना चुका
है. [wpse_comments_template]
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