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चांडिल : विस्थापितों ने समस्या और उसके समाधान को लेकर अपर निदेशक को सौंपा स्मार पत्र

Chandil (Dilip Kumar) : विस्थापित मुक्ति वाहिनी और बेरोजगार युवा विस्थापित संगठन की ओर से मंगलवार को सुवर्णरेखा बहुद्देशीय परियोजना के अपर निदेशक रंजना मिश्रा को विस्थापितों की समस्याओं के समाधान के संबंध में एक स्मार पत्र सौंपा गया. इसमें कहा गया कि विस्थापित समय-समय पर अपनी समस्याओं और समाधान के सूत्रों से परियोजना को अवगत कराते रहे हैं. इसमें से कई समस्याओं का समाधान करने की कोशिश हुई है और कुछ का समाधान भी हुआ है. स्मार पत्र सौंपने वाले प्रतिनिधिमंडल में विस्थापित मुक्ति वाहिनी से श्यामल मर्दी, नारायण गोप, बासुदेव आदित्यदेव, पंचानन महतो, आकलु महतो, अर्जुन कैवर्त, देवेन महतो, कार्तिक महतो, राजेन महतो, किरण वीर, अरविंद अंजुम, बेरोजगार युवा विस्थापित संगठन से दीनबंधु महतो, विनय मुर्मू, मंगल माझी, जगदीश सिंह सरदार आदि शामिल थे. इसे भी पढ़ें : जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-youth-jdu-launched-membership-drive-on-jp-jayanti/">जमशेदपुर

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विस्थापितों ने समाधान के लिए दिया ये सुझाव

विस्थापितों के रोजगार के लिए सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों के स्थान पर विस्थापितों की बहाली तत्काल शुरू की जाए, विभिन्न कंपनियों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे पानी के एवज में विस्थापितों को नौकरी देने के लिए स्थानीय प्रशासन को निर्देशित किया जाए और अनुकूल नीति का निर्माण किया जाए. मछली पालन और पर्यटन के क्षेत्र में स्थानीय सहकारी समिति के सहयोग से युवा विस्थापितों के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित किए जाएं. चांडिल बांध के किनारे लिफ्ट इरीगेशन और डीप बोरिंग के माध्यम से फ्रिज एरिया और आंशिक रूप से डूबने वाली जमीन को बहुफसली बनाया जाए. यह भी रोजगार का एक क्षेत्र बन सकता है. बांध के किनारे बड़े पैमाने पर फलदार वृक्षों की बागवानी को विकसित किया जाये. इसी के साथ फूड प्रोसेसिंग इकाइयों की स्थापना कर रोजगार के अवसर बढ़ाए जा सकते हैं. विस्थापितों के रोजगार के लिये बैंक ऋण की प्रक्रिया को सरल व सुगम बनाया जाए. सब्सिडी का विशेष प्रावधान निर्धारित किया जाए. जमशेदपुर के मानगो में सुवर्णरेखा बहुउद्देश्य परियोजना की जमीन पर प्रस्तावित अंतरराज्यीय बस अड्डा में बनाने वाली दुकानों का आवंटन सिर्फ और सिर्फ स्थानीय व विस्थापितों को किया जाए. महत्वपूर्ण स्थानों पर परियोजना की खाली पड़ी जमीनों पर बहुमंजिला मार्केट कॉम्प्लेक्स बनाकर विस्थापितों को आवंटित किया जाए. पुनर्वास स्थलों पर आवंटित आवासीय भूखंडों का मालिकाना राजस्व अभिलेख में दर्ज किया जाए. सभी विस्थापितों को एक मुश्त कृतज्ञता पैकेज का भुगतान किया जाए. कंपनियों से जल टैक्स की वसूली की जाए और उस राशि में से 50 प्रतिशत खर्च विस्थापितों के कल्याण के लिए किया जाए. इसके साथ ही प्रतिनिधिमंडल ने सरकार से झारखंड विस्थापन और पुनर्वास आयोग का गठन करने की भी मांग की है. [wpse_comments_template]

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