Chandil (Dilip Kumar) : चांडिल डैम के किनारे स्थित चांडिल प्रखंड क्षेत्र के
डिमुडीह के विस्थापित परिवारों ने चांडिल डैम में होने वाले एडवेंचर एक्टिविटी के आयोजन का विरोध किया
है. ज्ञात हो कि पर्यटन निदेशालय के निर्देश पर सरायकेला-खरसावां जिला के खेल शाखा द्वारा चांडिल डैम में पर्यटकों के लिए 25, 26 व 27 जुलाई को तीन दिवसीय नि:शुल्क एडवेंचर एक्टिविटीज होना
है. इसका आयोजन
डिमुडीह में भी किया जाना
है. विभाग
डिमुडीह को भी पर्यटन के क्षेत्र में विकसित करना चाहती
है. डिमुडीह, केसरगड़िया,
बोराबिंदा आदि गांवों के लोगों को डर है कि पर्यटन के विकास के नाम पर एक बार फिर उन्हें विस्थापित न कर दिया जाए.
इसे भी पढ़ें : जमशेदपुर:">https://lagatar.in/jamshedpur-fly-75-thousand-in-the-name-of-getting-cashback-amount/">जमशेदपुर:
कैशबैक राशि दिलाने के नाम पर उड़ाये 75 हजार वापस लौटाया खेल सामग्री
चांडिल डैम में होने वाले तीन दिवसीय एडवेंचर एक्टिविटीज को लेकर सोमवार को खेल सामग्री लेकर कई वाहन
डिमुडीह की ओर जा रही
थी. विस्थापितों को इसकी भनक लगने के बाद सभी एकजुट हुए और
सड़क पर विरोध करते हुए सामग्री लेकर पहुंचे वाहनों को वापस लौटा
दिया. विस्थापितों ने
सड़क पर
बेरिकेडिंग कर आवागमन अवरूद्ध कर
दिया. विस्थापितों ने आरोप लगाया कि जिला प्रशासन
डिमुडीह में ग्राम सभा किए बगैर और विस्थापितों को सूचना दिए बिना
डिमुडीह को पर्यटन स्थल बनाना चाहती
है. एडवेंचर एक्टिविटीज के आयोजन के पूर्व प्रशासन को ग्राम सभा को सूचना देना चाहिए था.
विस्थापितों ने बैठक कर लिया निर्णय
डिमुडीह में
एडबेंचर एक्टिविटीज को लेकर सोमवार को ग्राम प्रधान
लीलू सिंह की अध्यक्षता में डिमुडीह,
केसरगाड़िया और
बोराबिंदा के विस्थापितों की बैठक
हुई. बैठक के बाद ग्रामीणों ने
डिमुडीह में
एडबेंचर संचालन व पर्यटन स्थल का एक स्वर में विरोध किया
गया. मौके पर मकरा सोरेन ने कहा कि ग्राम सभा के अनुमति के बिना
डिमुडीह में पर्यटन स्थल हो चाहे कोई भी एक्टीविटीज हो नहीं
हाेने दिया
जाएगा. उन्होंने कहा
केसरगाड़िया व
डिमुडीह के विस्थापित पहले ही चांडिल डैम से विस्थापित हो चुके हैं और अब सरकार और विभाग मिलकर उन्हें फिर से विस्थापित करना चाहती
है. विस्थापितों ने कहा बगैर ग्रामसभा के अनुमति के
डिमुडीह को पर्यटन स्थल बनने नहीं
देंगे. बैठक में सुनील आर्डी, राम सिंह मुर्मू, कालीचरण हांसदा, मंजू बेसरा,
गंगामनी सिंह सरदा, पिंकी सिंह सरदार समेत
बड़ी संख्या में विस्थापित मौजूद थे. [wpse_comments_template]
Leave a Comment