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चांडिल : शुक्रवार से तीन दिनों तक बंद रहेंगे देवी मंदिरों के कपाट

Chandil (Dilip Kumar)अंबूवाची के कारण चांडिल अनुमंडल क्षेत्र के देवी मंदिरों के पट 25 जून तक बंद कर दिए गए है. इस दौरान मंदिरों में भक्तों के लिए पूजा-अंर्चना बंद रहेगा. मंदिरों में सिर्फ पुरोहित ही देवी को भोग लगाएंगे. गुरुवार को देर रात से ही अंबूवाची शुरू हो गया है. इसके कारण तीन दिनों तक मंदिरों के कपाट बंद किए जाते हैं. अंबूवाची को धरती माता की उर्वरता और रचनात्मक शक्ति का प्रतीक माना जाता है. अंबूवाची देवी कामाख्या के वार्षिक मासिक चक्र के सम्मान में मनाया जाता है. ऐसा माना जाता है कि कामाख्या देवी दिव्य स्त्री ऊर्जा का प्रतीक हैं और जीवन व उर्वरता की दाता हैं. हर साल आषाढ़ माह के सातवें से 10वें दिन तक अंबूवाची मनाया जाता है. चौथे दिन 26 जून को ब्रह्म मुर्हुत में विशेष पूजा-अर्चना के बाद मंदिरों के कपाट खोले जाएंगे. ओडिशा में इसे रजो पर्व के रूप में मनाया जाता है. इसे भी पढ़ें :  पीएम">https://lagatar.in/amidst-pm-modis-us-visit-obama-raised-questions-on-the-safety-of-minorities-in-india-congress-taunted/">पीएम

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बंद रहता है कृषि कार्य

अंबूवाची के दौरान किसान अपनी खेती का काम बंद रखते हैं. धरती माता पर जीवन-यापन करने वाले किसान इन तीन दिनों के दौरान ना धरती की खुदाई करते हैं, ना हल जोतते हैं और ना बीजारोपण करते हैं. मान्यता के अनुसार अंबूवाची धरती माता की उर्वरता और रचनात्मक शक्ति का प्रतीक है. मासिक चक्र के बाद ही धरती माता नई सृष्टी के लिए तैयार हो जाती है. मासिक चक्र के बाद ही धरती में नई फसल और पौधों का सृष्टि होता है. इन तीन दिनों के दौरान मिट्टी की खुदाई नहीं की जाती है. कहते है कि मिट्टी की खुदाई करने से धरती चोट पहुंचती है. परंपरा के अनुसार धरती माता को भूदेवी माना जाता है. चांडिल अनुमंडल क्षेत्र के किसान भी अंबूवाची के दौरान खेतों में खेती का कार्य नहीं करते हैं. इसे भी पढ़ें : चाईबासा">https://lagatar.in/chaibasa-chaibasas-basanti-will-run-in-china-selected-for-world-university-games/">चाईबासा

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शनिवार को नहीं होगी मां विपत्तारिणी की पूजा

मान्यता के अनुसार मां विपत्तारिणी की पूजा रथ यात्रा के बाद मंगलवार व शनिवार को ही की जाती है. लेकिन इस वर्ष रथयात्रा के बाद शनिवार के दिन अंबूवाची पड़ने के कारण मंदिरों के कपाट बंद रहेंगे. इसलिए मंदिरों में शनिवार को मा विपत्तारिणी की पूजा नहीं की जाएगी. पंडित समरेंद्र बनर्जी ने बताया कि आने वाले मंगलवार को मंदिरों में मो विपत्तारिणी की पूजा की जाएगी. अपने परिवार की सुख, शांति व सुरक्षा की कामना के लिए महिलाएं मां विपत्तारिणी की पूजा-अइर्चना करते हैं. पूजा के पीछे ऐसी मान्यता है कि परिवार में आने वाले हर संकट को मां विपत्तारिणी टाल देती हैं. इसलिए मां विपत्तारिणी को संतुष्ट करने के लिए महिलाएं उपवास रखती हैं. पूजा के लिए 13 प्रकार के फल व फूल और मिष्ठान्न भी प्रसाद स्वरूप चढ़ाया जाता है. वहीं, रक्षा सूत्र के रुप में 13 गांठ लगाए गए लाल रंग के धागे को मंदिर में पूजा कराने के बाद बांह में बांधा जाता है. [wpse_comments_template]

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