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चांडिल : नीमडीह के सोना डुंगरी में जनसभा कर आदिवासी कुड़मी समाज ने भरी हुंकार

Chandil (Dilip Kumar) : चांडिल अनुमंडल क्षेत्र के नीमडीह प्रखंड स्थित झिमड़ी स्टेडियम (सोना डुंगरी) में शनिवार को आदिवासी कुड़मी समाज का जनसभा (महाजुटान) जिला प्रभारी प्रभात कुमार महतो की अध्यक्षता में हुई. इस जनसभा में झाड़खंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा आदि क्षेत्रों से बड़ी संख्या में कुड़मी समुदाय के बुद्धिजीवी सह सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए. जनसभा में मुख्य अतिथि के रूप में रेल रोको आंदोलन के अगुवा रहे आदिवासी कुड़मी समाज के मुलखुंटी मुलमांता अजीत प्रसाद महतो उपस्थित थे. इसके साथ जनसभा में अति विशिष्ट अतिथि के रूप में पूर्व सांसद शैलेंद्र महतो, विशेष अतिथि केंद्रीय प्रवक्ता हरमोहन महतो, विशेष अतिथि के रूप में केंद्रीय महासचिव अधिवक्ता सुनील कुमार गुलिआर समेत कई गणमान्य उपस्थित थे. इसे भी पढ़ें : जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-vidya-bharti-chinmaya-vidyalaya-distributed-blankets-in-brahmashram/">जमशेदपुर

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आंदोलन को दिशा से भटकाने का प्रयास किया जा रहा है

आदिवासी कुड़मी समाज के मुलखुंटी मुलमांता अजीत प्रसाद महतो ने कहा कि कुड़मी समाज अपना अस्तित्व और अधिकार की लड़ाई में जन आंदोलन कर समाज को जागरूक कर रहा है. आंदोलन का मुख्य उद्देश्य कुड़मी समुदाय को अनुसूचित जनजाति में सूचीबद्ध कराना, कुड़माली भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल कराना और सारना धर्म कोड लागू कराना है. कुछ दिनों से तथाकथित आदिवासी लोग कुड़मियों का इतिहास बिना जाने, बिना पढ़े अनर्गल बयानबाजी कर रहे हैं, जो सरासर प्रायोजित किसी न किसी राजनैतिक फायदा लेने में लगे हैं. जिससे आंदोलन को दिशा से भटकाने का प्रयास किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि 31 जनवरी को झारखंड और ओडिशा राज्य के सभी प्रखंड में एक साथ डेपुटेशन दिया जाएगा. इसके बाद 27 मार्च को झारखंड और ओडिशा राज्य के सभी जिलों में एक साथ डेपुटेशन दिया जाएगा. मानसून सत्र में झाड़खंड और ओडिशा राज्य में विधानसभा घेराव और तब तक अगर कुड़मी जनजाति को एसटी सूची में सूचीबद्ध न होने पर झारखंड और ओडिशा राज्य में 20 सितंबर से फिर से आर्थिक नाकेबंदी सहित अनिश्चितकालीन डहर छेंका यानि रेल टेका (रोको) आंदोलन किया जाएगा. इसे भी पढ़ें : धनबाद:">https://lagatar.in/dhanbad-bccl-and-district-administration-face-to-face-in-stopping-coal-theft/">धनबाद:

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मुंडा सरकार ने कुड़मी को एसटी में शामिल करने की अनुशंसा की थी

अति विशिष्ट अतिथि पूर्व सांसद शैलेंद्र महतो ने कहा कि झारखंड राज्य बनने के तीन वर्ष बाद 23 नवंबर 2004 को अर्जुन मुंडा सरकार ने कुड़मी जनजाति को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने का अनुशंसा किया था. वर्तमान में अर्जुन मुंडा स्वयं केंद्र सरकार में आदिवासी मंत्रालय के मंत्री हैं. इन्होंने पिछले दिनों 12 जनजाति को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिया. लेकिन 2004 में स्वयं द्वारा अनुशंसित किया गया और कुड़मी जनजाति को छोड़ दिया गया. इसलिए आंदोलन निरंतर जारी है. मौके पर विशेष अतिथि केंद्रीय प्रवक्ता हरमोहन महतो ने कहा कि कुड़मी जनजाति का अनुसूचित जनजाति में सूचीबद्ध करने का मांग नया नहीं है. यह मांग बहुत पहले से चलती आ रही है. जिससे दबाने का काम केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा द्वारा किया जा रहा है. उन्हें मालूम होना चाहिए लोकसभा, राज्यसभा और राज्य के विधानसभा में मांगों को लेकर प्रखर रुप से आवाज उठ रही है. इसे भी पढ़ें : दो">https://lagatar.in/inauguration-of-two-day-south-jharkhand-division-provincial-sports-competition/">दो

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72 वर्षों से लगातार आंदोलन कर रहे है कुड़मी जनजाति

जनसभा में विशेष अतिथि केंद्रीय महासचिव अधिवक्ता सुनील कुमार गुलिआर ने कहा कि 1950 से पहले झाड़खंड, पश्चिम बंगाल, ओडि़शा और असम के टोटेमिक कुड़मी जनजाति देश की आजादी से पहले प्रिमिटिव ट्राइब्स (आदिम जनजाति) में सूचीबद्ध था, लेकिन जब अनुसूचित जनजाति का सूची तैयार हुआ तब सिर्फ कुड़मी को छोड़कर सभी आदिम जनजातियों को अनुसूचित जनजाति की सूची में सूचीबद्ध किया गया. तब से अब तक 72 वर्षों से लगातार कुड़मी जनजाति एसटी सूची में सूचीबद्ध करने के लिए आंदोलनरत हैं. इसे पुनः स्थापित करना हमारे समाज का मौलिक कर्तव्य हैं. मौके पर केंद्रीय अध्यक्ष शशांक शेखर महतो, प्रदेश अध्यक्ष पद्मलोचन महतो, केंद्रीय सह सचिव जयराम महतो, ओडिशा राज्य प्रभारी शशधर काड़ुआर, अशोक पुनअरिआर, गुणधाम मुतरुआर, विश्वरंजन महतो उर्फ कार्तिक महतो, निवारण महतो आदि ने भी अपने विचार रखे. [wpse_comments_template]

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