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चांडिल : कुड़मी को एसटी का दर्जा दिलाने के लिए अनुशंसा करने वालों का होगा सामाजिक बहिष्कार

Chandil (Dilip Kumar) : वर्तमान समय में आदिवासी समाज पर राजनीतिक और सामाजिक रूप से अतिक्रमण किया जा रहा है. कुड़मी समाज की नजर अब आदिवासियों के जमीन-जायदाद पर टिकी है. साथ ही उनकी मंशा आदिवासियों के लिए सुरक्षित संवैधानिक पदों को हाईजेक करने की है. इसे आदिवासी समाज कतई बर्दाश्त नहीं करेगा. उक्त बातें पूर्व मंत्री गीताश्री उरांव ने कही. वे रविवार को चांडिल प्रखंड के गांगुडीह फुटबॉल मैदान में आयोजित आदिवासी आक्रोश जनसभा को संबोधित कर रही थी. संयुक्त आदिवासी सामाजिक संगठन चांडिल अनुमंडल के बैनर तले आयोजित इस सभा में उन्होंने कहा कि अपने हक-अधिकार और अस्तित्व की रक्षा के लिए समस्त आदिवासियों का एकजुट रहना होगा. इसे भी पढ़ें : जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-jee-advanced-exam-was-peaceful-at-two-centers-in-the-city/">जमशेदपुर

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अनुशंसा करने वाले का होगा सामाजिक बहिष्कार

जनसभा को संबोधित करते हुए लक्ष्मी नारायण मुंडा ने कहा कि आदिवासी समाज के विधायक व सांसद अगर कुड़मी को एसटी में शामिल करने का समर्थन करते है तो आदिवासी समाज उनका सामाजिक बहिष्कार करेगा. आदिवासी जन परिषद के प्रेमशाही मुंडा ने आक्रोश जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि कुड़मियों द्वारा आदिवासियों के हक और अधिकार को छीनने का प्रयास किया जा रहा है. आदिवासी समाज के वीर शहीदों को अपना बताकर इतिहास के साथ छेड़छाड़ किया जा रहा है. [caption id="attachment_658007" align="aligncenter" width="600"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/06/04-chandil-6_595.jpg"

alt="" width="600" height="400" /> जनसभा में उपस्थित आदिवासी समाज के लोग[/caption] इसे भी पढ़ें : मनोहरपुर">https://lagatar.in/manoharpur-misuse-of-government-money-in-the-name-of-jalminar-in-saranda-digha-bitkilsoy/">मनोहरपुर

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जनसभा में कई प्रस्ताव पारित

आदिवासी आक्रोश जनसभा में कई प्रस्ताव पारित किए गए. मौके पर कुड़मियो को आदिवासी नहीं बनने देने का संकल्प लिया गया. वहीं तय हुआ कि अगर कोई आदिवासी समाज का सांसद, विधायक व नेता कुड़मियों को आदिवासी बनने की अनुशंसा करता है तो उसका समाजिक बहिष्कार किया जाएगा. पूरे झारखंड राज्य के आदिवासियों की जमीन, परंपरा, भाषा-संस्कृति और जल जंगल जमीन बचाने के लिए राज्यव्यापी आंदोलन तेज किया जाएगा. मांग की गई कि प्रकृति पूजक आदिवासियों के लिए अलग धर्म कोड दिया जाए. जनसभा को पश्चिम बंगाल के सुमित हेंब्रम, प्रशांत टुडू, हरिपद सिंह सरदार, पातकोम दिशोम पारगाना रामेश्वर बेसरा, श्यामल मार्डी, सुधीर किस्कू, मानिक सिंह सरदार समेत कई लोगों ने भी संबोधित किया. इसे भी पढ़ें : जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-marwari-society-distributed-syrup-and-fruits-at-baridih-chowk/">जमशेदपुर

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रैली की शक्ल में पहुंचे लोग

चांडिल प्रखंड क्षेत्र के गांगुडीह फुटबॉल मैदान में संयुक्त आदिवासी सामाजिक संगठन चांडिल अनुमंडल के बैनर तले आयोजित विशाल आदिवासी आक्रोश जनसभा में बड़ी संख्या में महिला, पुरुष, बुजुर्ग व नौजवान पारंपरिक वेशभूषा और पारंपरिक हथियार के साथ शामिल हुए. कार्यक्रम स्थल पर चारों ओर से लोग बाइक रैली और पैदल रैली की शक्ल में पहुंच रहे थे. तीखी धूप में भीषण गर्मी को मात देते आदिवासी समुदाय ने अपना शक्ति प्रदर्शन किया. कार्यक्रम से पहले आदिवासी समाज ने संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ भीमराव अंबेडकर, स्वतंत्रता सेनानी वीर शहीद सिदो-कान्हू, तिलका मांझी, बिरसा मुंडा, रघुनाथ सिंह, बुधु भगत, तेंलगा खड़िया आदि को श्रद्धांजलि दी गई. [wpse_comments_template]

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