Chandil (Dilip Kumar) : कुड़मी समुदाय को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने की मांग खोयी हुई पहचान और अस्तित्व की लड़ाई है. कुड़मियों की मांग कोई जाति केंद्रित या फायदे की राजनीति नहीं है. उक्त बातें आदिवासी कुड़मी समाज के केंद्रीय सह सचिव जयराम ने कही. वे बुधवार को नीमडीह प्रखंड के गुंडा (काशीडीह) स्थित हरिमंदिर प्रांगण में आदिवासी कुड़मी समाज की बैठक को संबोधित कर रहे थे. 20 सितंबर से नीमडीह स्टेशन में आहूत रेल टेका व डहर छेंका आंदोलन की तैयारी को लेकर आहूत बैठक की अध्यक्षता समाजसेवी विष्णु महतो ने की. पंचायत स्तरीय तैयारी बैठक में डीहटांढ़, रामनगर, सीमा, गुंडा, काशीडीह आदि जगहों से बड़ी संख्या में समाज के लोग शामिल हुए. इसे भी पढ़ें : चाईबासा">https://lagatar.in/chaibasa-mother-absconds-with-her-lover-after-keeping-20-kg-rice-in-the-house-for-three-innocent-children/">चाईबासा
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झारखंड में तीन स्थानों पर होगा आंदोलन
जयराम महतो ने बताया कि इस मुहिम के अंतर्गत झारखंड में चार जगह नीमडीह, गोमो, मुरी व घाघरा में एक साथ आंदोलन होगा. वहीं पश्चिम बंगाल में दो स्थान कुशटांड व खेमाशुली और ओडिशा के तीन स्थानों में भी रेल टेका एवं डहर छेंका आंदोलन एक साथ चलेगा. सभी स्थानों में 20 सितंबर से एक साथ अनिश्चितकालीन रेल टेका एवं डहर छेंका आंदोलन शुरू होगा. 73 वर्षों से जो मानवीय अधिकार की नुकसान आदिवासी कुड़मी समुदाय के लोगों के साथ किया गया है. इसकी भरपाई भारत सरकार कुड़मियों के अस्तित्व को वापस कर ही कर सकती है. इसे भी पढ़ें : नोवामुंडी">https://lagatar.in/noamundi-bjp-collected-soil-and-rice-from-door-to-door/">नोवामुंडी: भाजपा ने घर-घर जाकर मिट्टी व चावल किया संग्रह
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