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चांडिल : आदिवासी सामाजिक संगठन ने कुड़मियों की मांग को बताया अनुचित

Chandil (Dilip Kumar) : संयुक्त आदिवासी सामाजिक संगठन चांडिल अनुमंडल का एक प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को टीआरआई के निदेशक रणेंद्र कुमार से मिला. इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने कुड़मी जाति द्वारा अपने को एसटी सूची में शामिल करने की मांग को अनुचित बताते हुए निदेशक को अवगत कराया है. संयुक्त आदिवासी सामाजिक संगठन द्वारा डॉ रामदयाल मुंडा जनजाति शोध संस्थान के निदेशक रणेद्र कुमार को सौंपे गए ज्ञापन में कहा कि कुड़मी समाज एसटी सूची में शामिल होने की मांग को लेकर बार-बार रेल व सड़क मार्ग जाम करके बाधा उत्पन्न कर रहे हैं. जिसके कारण झारखंड के आम जनमानस को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. संगठन द्वारा निदेशक को सौंपा गए ज्ञापन में यह भी कहा गया कि कलकत्ता हाई कोर्ट ने कुड़मी जाति की पीआईएल को पिछले दिनों असंवैधानिक घोषित कर दिया. इसे भी पढ़ें : जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-team-munka-kedia-got-a-huge-victory-in-singhbhum-chamber-elections/">जमशेदपुर

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कुड़मी जाति आदिवासियों से अलग

वर्ष 2004 की जनजाति शोध संस्थान झारखंड की अपनी रिपोर्ट में कुड़मी जाति को हिंदू शब्द में व्याख्या किया है. उनकी भाषा, संस्कृति, रहन-सहन आचरण, जीवनशैली और लक्षण आदिवासी से बिल्कुल अलग पाया गया है. वहीं कुड़मी द्वारा एसटी में शामिल होने के लिए झारखंड उच्च न्यायलय में दायर किया गया पीआईएल संख्या 6084030/2015 को उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया है. ज्ञापन में कहा गया है कि विभिन्न लेखकों एवं सरकारी दस्तावेजों में कुड़मी को अनुसूचित जन जाति में कभी भी शामिल नहीं था. क्योंकि कुड़मी जाति आदिवासियों से अलग है. आदिवासी संगठन द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि झारखंड में 32 जनजाति है. इन जनजातीय का दयनीय स्थिति है. ऐसे में आदिवासियों का शोषक वर्ग कुड़मी जाति को एसटी में सूची में सरकार शामिल करता है तो असली आदिवासियों और पिछड़ जाएंगे. प्रतिनिधिमंडल में सुधीर किस्कू, मानिक सरदार, लक्ष्मीनारायण सिंह मुंडा, ललित सरदार, बुद्धेश्वर टुडू आदि शामिल थे. [wpse_comments_template]

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