में कोयले के अवैध कारोबार को कौन संरक्षण दे रहा है ? बताया जा रहा है कि उक्त दंतैल जंगली हाथी लंबे समय से झुंड से अलग होकर अकेले इसी क्षेत्र में घुम रहा है. आस-पास के दर्जनों गांवों में अपनी उपस्थिति दर्ज करते हुए एक से दूसरे गांव का भ्रमण करते रहता है. इस दौरान उक्त हाथी खेत-खलिहानों में अनजा को निवाला बनाता है. धान की फसल तैयार होने के बाद इस क्षेत्र में जंगली हाथियों अधिक संख्या में पहुंचते है. इस क्षेत्र में सारंडा और पश्चिम बंगाल के अयोध्या पहाड़ से भी जंगली हाथियों का झुंड पहुंचता है. इसे भी पढ़ें : किरीबुरु">https://lagatar.in/kiriburu-heavy-rains-in-entire-saranda-cold-wind-is-blowing/">किरीबुरु
: पूरे सारंडा में हो रही भारी बारिश, चल रही हैं ठंडी हवा
नासुर बनता जा रहा जंगली हाथी की समस्या
[caption id="attachment_969529" align="alignright" width="600"]alt="" width="600" height="400" /> जंगल में घूमता हाथी.[/caption] ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र में जंगली हाथियों के उत्पात से आम जन-जीवन खासे परेशान है. निकटवर्ती दलमा वन्य जीव आश्रयणी से अचानक जंगली हाथियों को झुंड आबादी वाले क्षेत्र में पहुंच जाते है और गांव में मकान-दुकान के अलावा खेतों में लगी फसलों को अपना निवाला बनाकर और पैरों तले रौंदकर बर्बाद करते हैं. कई बार तो जंगली हाथियों लोगों को कुचलकर मार भी देते हैं. ऐसे में लोग दहशतभरी माहौल में रहने पर मजबूर हैं. ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र के चारों प्रखंड चांडिल, ईचागढ़, नीमडीह और कुकडू के घनी आबादी वाले इलाकों में भी जंगली हाथी की समस्या है. इसे भी पढ़ें : अनुसंधान">https://lagatar.in/online-applications-invited-from-policemen-willing-to-work-in-research-training-school/">अनुसंधान
प्रशिक्षण विद्यालय में कार्य करने के लिए इच्छुक पुलिसकर्मियों से मांगा गया ऑनलाइन आवेदन जंगली हाथियों से सुरक्षा सुनिश्चित करने को लेकर लोगों ने कई बार आंदोलन किया, जनप्रतिनिधि समेत विभागीय अधिकारियों के समक्ष गुहार लगाई, लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं हो सका. जंगली हाथी द्वारा किसी की जान लेने के बाद जनप्रतिनिधि दल-बल के साथ पीड़ित के परिजनों से मिलने पहुंच जाते है और शोक व्यक्त करने के बाद वन विभाग को फोन से समस्या का समाधान करने की हिदायत देकर अपने कर्तव्य का अनुपालन करते हैं. [wpse_comments_template]
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