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चांडिल के शिवालय : ईचागढ़ का रहस्यमयी चतुर्मुखी शिव मंदिर जहां का शिवलिंग अंग्रेज भी नहीं उठा पाए

Chandil (Dilip Kumar) : चांडिल अनुमंडल क्षेत्र के ईचागढ़ प्रखंड में ईचागढ़ और लेपाटांड के बीच अवस्थित है चतुर्मुखी शिव मंदिर. इस मंदिर में भगवान शिव शंकर का चार मुंह वाला शिवलिंग स्थापित है. बताया जाता है कि ईचागढ़ का चतुर्मुखी शिवलिंग देश के गिने-चुने चतुर्मुखी शिवलिंगों में से एक है. यह मंदिर आसपास के लोगों के आस्था का प्रमुख केंद्र है. आवागमन की सुविधा नहीं रहने के कारण दूर-दराज के लोग पहले अपने आराध्यदेव के दर्शन-पूजन के लिए चतुर्मुखी शिव मंदिर नहीं पहुंच पाते थे. लेकिन अब ईचागढ़ में पुल बनने के बाद बाहर से भी श्रद्धालु मंदिर पहुंचते हैं. वहीं, पवित्र सावन माह में शिवलिंग पर जलार्पण करने के लिए भी यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है. हालांकि सावन के अलावा भी महाशिवरात्रि पर यहां भक्तों का रेला लगा रहता है. इसे भी पढ़े : जगन्नाथपुर">https://lagatar.in/jagannathpur-workers-engaged-in-road-construction-work-protested-angry-over-not-getting-minimum-wages/">जगन्नाथपुर

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ऐसी है मंदिर की मान्यता

कहा जाता है कि यहां एक सुरंग है. जब राजघराने का मुख्यालय देवपुर वर्तमान के दयापुर में हुआ करता था, तब राजा प्रतिदिन सुरंग होकर पूजा करने मंदिर आते थे. उस समय यहां बड़ा मंदिर हुआ करता था और विशाल क्षेत्र में मंदिर फैला था. इसके अवशेष भी अब तक चारों ओर बिखरें पड़े हैं, जो सरकारी उदासीनता के कारण अब धीरे-धीरे धुमिल होने लगे हैं. हजारों साल पुराने इस शिवलिंग के रख रखाव और इसे संरक्षित करने के लिए सरकार की ओर से कोई विशेष पहल नहीं की गई है. ग्रामीणों ने आपसी सहयोग से चारदीवारी वाले एक छोटे मंदिर का निर्माण कराया है. यदि सरकार इस क्षेत्र में खुदाई कराए तो यहां पर निश्चित तौर पर किसी बड़े पुरातात्विक धरोहरों की श्रृंखला मिल सकती है. इसे भी पढ़े : चाईबासा">https://lagatar.in/chaibasa-three-day-provincial-shishu-vatika-acharya-training-cum-workshop-started/">चाईबासा

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चतुर्मुखी शिव मंदिर के निकट ही बांका महादेव है अवस्थित 

चतुर्मुखी शिव मंदिर के निकट ही बांका महादेव अवस्थित है. कहते हैं कि अंग्रेज बांका महादेव को उठाकर कहीं ले जाने की कोशिश कर रहे थे. लेकिन जिस बैल गाड़ी से महादेव की शिवलिंग को ले जाया जा रहा था, वह गाड़ी उसी जगह पर टूटकर दो भागों में बंट गया. इसके बाद जमीन में गिरे शिवलिंग को अंग्रेज उठा नहीं पाए. इसके बाद से वह शिवलिंग आज भी उसी जगह अवस्थित है. इसे भी पढ़े : गालूडीह">https://lagatar.in/galudih-people-are-upset-due-to-the-parking-of-vehicles-under-the-passing-bridge-there-have-been-many-accidents/">गालूडीह

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ऐसे पहुंचे मंदिर

चतुर्मुखी शिव मंदिर पहुंचने के लिए कई रास्ते हैं. टाटा-रांची राष्ट्रीय राजमार्ग-33 पर स्थित चौका से ईचागढ़ की ओर करीब 12 किलोमीटर दूर चतुर्मुखी शिव मंदिर है. मंदिर तक जाने के लिए पातकुम तक सड़क की स्थिति अच्छी है. लेकिन इसके बाद सड़क खस्ता हाल है. वहीं, दूसरी ओर रंगामाटी सड़क पर स्थित डुमटांड मोड़ से लेपाटांड, ईचागढ़ सड़क होकर भी मंदिर तक पहुंचा जा सकता है. लेकिन यह सड़क भी अत्यंत ही बदहाल स्थिति में है. इस सड़क पर छोटे चार पहिया वाहन से जाना परेशानी का सबब बन सकता है. इसके अलावा कुकड़ू प्रखंड क्षेत्र से कारकीडीह के रास्ते होकर भी मंदिर तक पहुंचा जा सकता है, लेकिन इस सड़क की स्थिति भी बदहाल है. इसे भी पढ़े : जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-jmm-burglary-in-ajsu-former-block-president-joined-jmm-with-supporters/">जमशेदपुर

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