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चंद्रगुप्त कोल परियोजना : 417 एकड़ वन भूमि का रिकॉर्ड गायब होने पर CID ने GM व MDO को भेजा नोटिस

Saurabh Singh Ranchi: सीसीएल की चंद्रगुप्त ओसीपी कोल परियोजना के जमीन अधिग्रहण को लेकर 417 एकड़ वन भूमि का रिकॉर्ड गायब कर दिया गया. इस मामले में झारखंड सीआईडी ने सीसीएल के जीएम, एमडीओ सुशी इंफ्रा एंड माइनिंग लिमिटेड कंपनी को नोटिस भेजा है. मामले को लेकर सीआईडी पूछताछ करेगी. गौरतलब है कि सीसीएल की चंद्रगुप्त ओसीपी कोल परियोजना के जमीन अधिग्रहण को लेकर 417 एकड़ वन भूमि का रिकॉर्ड गायब कर दिया गया. जमीन आवंटन में दस्तावेजों में भी भारी छेड़छाड़ की गयी है. इसकी शिकायत मंटू सोनी ने डीजीपी समेत भारत सरकार और झारखंड सरकार से की थी. इसे भी पढ़ें - भारत">https://lagatar.in/india-suspends-chinese-governments-ex-account-of-global-times/">भारत

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अवैध रूप से सरकार से वन भूमि को आवंटित करा लिया गया
उल्लेखनीय है कि हजारीबाग और चतरा में सीसीएल के चन्द्रगुप्त ओसीपी कोल ब्लॉक परियोजना आवंटित की गयी है. जिसमें हजारीबाग जिला अन्तर्गत केरेडारी अंचल के मौजा पचड़ा चट्टी बरियातु बुकरू सिजुआ और जोरदाग अंतर्गत भूमि का अधिग्रहण किया गया है, जिसके लिये सरकारी कर्मियों (जिला प्रशासन और वन विभाग), सीसीएल के आधिकारियों से मिलीभगत कर षड़यंत्र के तहत करीब 417 एकड़ वन भूमि का दस्तावेज गायब कर दिया गया. साथ ही अवैध रूप से सरकार से वन भूमि को आवंटित कराकर बतौर एमडीओ (खनन डेवलपर और संचालन) खनन कार्य करने के लिये हैदराबाद की सुशी इंफ्रा एंड माइनिंग लिमिटेड कंपनी को दिया गया है. जिसके लिये अंचल अधिकारी केरेडारी राजस्व अभिलेखागार, जिला अभिलेखागार से इस 417 एकड़ भूमि का रिकॉर्ड गायब किया गया है, जिसका उल्लेख डीसी हजारीबाग के कार्यालय ज्ञापांक-2350/10 दिनांक-25जून 2022 के माध्यम से प्रपत्र-1 (प्रमाण पत्र) के अन्तर्गत निर्गत प्रमाण में में किया गया है.
किसी प्रकार की शिकायत नहीं दर्ज कराई गई
417 एकड़ भूमि के दस्तावेज के गायब होने के संबंध में अंचल कार्यालय केरेडारी, राजस्व अभिलेखागार, जिला अभिलेखागार और डीसी कार्यालय द्वारा किसी प्रकार से रिकॉर्ड के गायब होने के संदर्भ में प्राथमिकी, सनहा या अंतरिक जांच का उल्लेख अपने पत्र में नहीं किया गया है,उसके बावजूद बिना जांच/कार्रवाई किये ही डीसी कार्यालय से प्रपत्र-1 के अन्तर्गत प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया. यह भी बात सामने आई है कि वन विभाग के कार्यालय से भी 417 एकड़ भूमि से संबंधित जानकारी प्राप्त करने और कागजातों की छानबीन के संबंध में कोई पत्राचार नहीं किया गया. जबकि प्रपत्र 1 प्रमाण पत्र डीसी कार्यालय से जारी होने के बाद वन विभाग को प्राप्त होने पर वन विभाग द्वारा भी बिना जांच पड़ताल किये भारत सरकार को भूमि आवंटित करने के लिए अनुशंसा करके भेज दिया गया. जिसके बाद भारत सरकार ने इस भूमि को अधिग्रहण के लिये विमुक्त कर दिया. फिर सीसीएल की ओर से सुशी इंफ्रा एंड माइनिंग लिमिटेड कंपनी को खनन कार्य करने के लिये आवंटित कराकर भूमि दे दिया गया.
लेटर पैड पर ना तो लेटर नंबर और ना ही तिथि अंकित है
साल 2021 में अंचल अधिकारी केरेडारी, मनोज कुमार (चीफ मैनेजर माइनिंग,) चन्द्रगुप्त ओपेन कास्ट प्रोजेक्ट और संजीव कुमार (मैनेजर) ओपेन कास्ट प्रोजेक्ट सीसीएल, चन्द्रगुप्त के द्वारा उक्त प्रश्नगत भूमि अधिग्रहण से संबंधित एक सूची तैयार किया गया, जिसमें पूर्व में डीसी द्वारा जो प्रपत्र 1 प्रमाण पत्र निर्गत किया गया है, जिसमें भूमि का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने की बात का उल्लेख था, उससे संबंधित खाता प्लॉट के विवरण में छेड़छाड़ कर दस्तावेज को तीनों के द्वारा तैयार किया गया. उस दस्तावेज में उसी भूमि में छेड़छाड़ किया गया है, जिसमें डीसी के द्वारा भूमि का विवरण उपलब्ध नहीं होने का उल्लेख किया गया है. यह भी उल्लेखनीय है कि प्रपत्र ॥ बचनबद्धता पत्र जो कि मनोज कुमार (मुख्य प्रबंधक माइनिंग) चन्द्रगुप्त ओपेन कास्ट प्रोजेक्ट आम्रपाली चन्द्रगुप्त क्षेत्र सीसीएल के द्वारा सीसीएल के लेटर पैड पर जारी किया गया, उसमें ना तो लेटर नंबर और ना ही तिथि अंकित है. परियोजना प्रस्ताव संख्या और वर्ष का स्थान भी खाली है. जिससे स्पष्ट होता है कि उस परियोजना में अवैध रूप से भूमि आवंटन करने के लिए बड़े पैमाने पर पदों का दुरूपयोग करते हुए पड्यंत्र के तहत दस्तावेजों का छेड़छाड़ कर भूमि आवंटित कराया गया है.
फर्जी दस्तावेज बनाकर मुआवजा लेने की तैयारी
किए गए शिकायत में कहा गया है कि सभी कृत्यों को करने के पीछे मंशा यह भी है, कि एक तरफ 417 एकड़ भूमि का रिकॉर्ड गायब करके उसकी आड़ में उक्त भूमि का फर्जी दस्तावेज बनाकर मुआवजा ले लिया गया है या ले लेने की योजना तैयार की गयी है, इस फर्जी दस्तावेज को तैयार करने के पीछे बहुत बड़े आर्थिक लाभ की पृष्ठभूमि तैयार की गयी है, जिसको इस बात से समझा जा सकता है कि अगर कंपनी के द्वारा उस परियोजना में प्रति एकड़ 25 लाख रूपया मुआवजा तय किया जाता है तो 417 एकड़ से गणना की जाये तो करीब अरबो रूपयों का घोटाला होने की पृष्ठ भूमि तैयार कर ली गयी है. 417 एकड़ भूमि की फर्जी तरीके से रिकॉर्ड गायब कर विभागीय स्वीकृती प्राप्त की गयी है, उसका उपयोग सीधे सुशी इंफ्रा एंड माइनिंग लिमिटेड कंपनी खनन कार्य के लिए करने वाली है. इसे भी पढ़ें - रांची">https://lagatar.in/danger-of-heat-stroke-in-11-districts-including-ranchi-yellow-alert-issued/">रांची

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