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चंदवा : कस्तूरबा में पढ़ने वाली बच्चियों से कैदी की तरह मिलते हैं परिजन

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Chandwa : कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में अध्ययनरत बच्चियों के परिजनों को उनसे मिलने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है. इंतजार के बाद भी बच्चियों को उनके परिजनों से जेल में बंद कैदियों की तरह एक छोटी से खड़की से मिलने दिया जाता है. परिजन अपनी बच्ची को ठीक से निहार भी नहीं पाते हैं. नाम न छापने की शर्त पर एक गार्जियन ने बताया कि यहां आने वाले परिजनों को गेट के बाहर घंटों इंतजार करना पड़ता है. उसके बाद बच्ची से मिलने भी मिलता है तो एक छोटी से खिड़की से मानो जेल में बंद कैदी से वह मुलाकात कर रहे हों. अपनी बच्ची को देखने का बहुत मन करता है तो उससे मिलने आ जाते हैं, मगर यहां तो अपनी बच्ची को ठीक से निहारने भी नहीं मिलता है. गेट के बाहर से ही बच्ची से बात करनी पड़ती है. उक्त शिकायत के संबंध में पूछे जाने पर कस्तूरबा आवासीय विद्यालय की इंचार्ज ने बताया कि परिजनों को बच्चियों से मिलने के लिए महीने में दो दिन का समय निर्धारित है. मगर परिजन जब तब बच्चियोंं से मिलने पहुंच जाते हैं. ऐसे में बच्चियों से उन्हें गेट पर ही मिलने दिया जाता है. इसमें शिकायत करने वाली कोई बात नहीं होनी चाहिए. इसे भी पढ़ें : पटनाः">https://lagatar.in/patna-fodder-scam-case-lalu-appears-in-cbi-special-court/">पटनाः

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