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सिर्फ बीपी-शुगर और बुखार की होती है जांच
ग्रामीणों का कहना है कि यहां न तो डॉक्टर और न दवाई ही रहता है. यहां सिर्फ बीपी-शुगर और बुखार की जांच होती है. कुछ भी होने पर ग्रामीणों को बाहर जाना पड़ता है. स्वास्थ्य कर्मियों के रहने के लिए आवास तो बनवाया गया है, मगर वह रहने लायक नहीं है. पूरी तरह से जर्जर हो चुका है. मजबूरन स्वास्थ्य कर्मियों को किराये पर रहना पड़ता है. जल्द ही इस ओर ध्यान नहीं दिया गया तो चिकित्साकर्मियों के रहने के लिए बना आवास खंडहर में तब्दील हो जायेगा. अतिरिक्त स्वास्थ्य उपकेंद्र लोहरसी में डाॅक्टर नहीं रहने के बारे में जब सीएचसी प्रभारी डाॅ. एनके पांडे से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि डाॅक्टरों की कमी है. सीएचसी चंदवा में भी मात्र तीन ही डाॅक्टर हैं. डाॅक्टर बड़ाईक को सप्ताह में दो दिन वहां रहना है. व्यवस्था में सुधार कराने का प्रयास किया जा रहा है. इसे भी पढ़ें : बिहार">https://lagatar.in/bihar-200-huts-destroyed-due-to-gas-cylinder-explosion-loss-of-lakhs/">बिहार: गैस सिलिंडर फटने से 200 झोपड़ियां खाक, लाखों का नुकसान [wpse_comments_template]

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