विवेकानंद शैक्षणिक चैरिटेबल ट्रस्ट संस्थान ही निकला फ्रॉड, युवकों से हजारों की ठगी कर हुआ फरार
Chandwa : सरकारी शिक्षा की लचर व्यवस्था का निजी विद्यालय तो फायदा उठा ही रहे हैं, इसका फायदा ठग भी उठा ले रहे हैं. ग्रामीण क्षेत्र के बेरोजगार युवकों को शिक्षा के क्षेत्र में आकर उज्जवल भविष्य का सब्जबाग दिखा अपना शिकार बना रहे हैं. ठगों ने चैरिटेबल ट्रस्ट बनाकर हजारों युवाओं से लाखों की ठगी कर ली. ठगों ने स्वामी विवेकानंद शैक्षणिक चैरिटेबल ट्रस्ट संस्थान बनाकर शिक्षकों को नियुक्ति पत्र देकर नियुक्त किया गया है. इतना ही नहीं सिस्टम तालिका में सबकी माहवार सैलरी स्लिप दिखाई गई है, जिसमें स्टेट एजुकेशन प्रोजेक्ट ऑफिसर की मंथली सैलरी पच्चास हजार रुपए तथा टीए+डीए चालीस हजार, स्टेट प्रोजेक्ट प्लानिंग ऑफिसर की चालीस हजार, टीए+डीए तीस हजार तथा रीजनल ऑफिसर की सैलरी पैंतीस हजार टीए+डीए बीस हजार के साथ ही शिक्षकों की सैलरी तीन माह तक साढ़े तीन हजार रुपये तथा चौथे माह से साढ़े चार हजार रुपए चार्ट के माध्यम से दिखाई गई है. ठगी के शिकार हुए धनराज यादव ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा कि मैं एक बेरोजगार युवक हू. मैं उन लोगों के दिखाए सब्जबाग में फंसकर अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने के चक्कर में फंस गया. उन लोगों के द्वारा मुझे एफओ का रैंक दिया गया, जिसमें मुझे सात हजार रुपए प्रतिमाह देने की बात कही गई थी. इसी लालच में मैंने अपने पंचायत क्षेत्र के 28-30 युवकों को शिक्षक के रूप में नियुक्त करवाया. ट्रस्ट ने सभी से 1500 रुपये के हिसाब से ज्वाइनिंग के नाम पर लिया. एक महीना बीत जाने के बाद भी शिक्षकों को मानदेय नहीं मिला. सभी मुझसे सैलरी मांगने लगे. मैंने जब अपने सीनियर को फोन लगाया तो फोन बंद आने लगा. बाद में पता चला कि विवेकानंद शैक्षणिक चैरिटेबल ट्रस्ट संस्थान ही फ्रॉड थी. युवकों से ज्वाइनिंग के नाम पर रुपए वसूल कर भाग गई. उपरोक्त संबंध में प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी का पक्ष जानने के लिए उनसे कई बार संपर्क करने की कोशिश की गई, पर संपर्क नहीं हो सका, इस वजह से उनका पक्ष नहीं मिल सका. इसे भी पढ़ें : कौड़ियों">https://lagatar.in/preparation-to-buy-land-worth-crores-at-throwaway-prices/">कौड़ियोंके मोल जमीन हथियाने की तैयारी [wpse_comments_template]
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