Jharkhand News: केंद्र सरकार द्वारा नीतियों में किये गये बदलाव की वजह से अर्थिक मामलों में राज्य की निर्भरता केंद्र पर और ज्यादा बढ़ेगी. फिलहाल राज्य सरकार अपने कुल खर्चों में 45%-47% तक ही जुटा पाती है. बाकी पैसों के लिए उसे केंद्र पर निर्भर रहना पड़ता है. यानी सरकार अपनी जरूरत के 100 रुपये में 45-47 रुपये ही जुटा पा रही है.
राज्य की अपनी आमदनी के स्रोत में टैक्स रेविन्यू और नन-टैक्स रेविन्यू शामिल है. राज्य सरकार को अपनी सालाना जरुरतों को पूरा करने के केंद्र सरकार से केंद्रीय करों में हिस्सेदारी के अलावा अनुदान की राशि मिलती है. इससे भी सरकार की जरूरतें पूरी नहीं होने पर उसे कर्ज लेना पड़ता है.
वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2025-26 के वित्तीय आंकड़ों से इस बात की जानकारी मिलती है कि इस अवधि में राज्य के कुल राजस्व में राज्य की हिस्सेदारी 45%-47.94% रही है. जबकि केंद्र की हिस्सेदारी 55%- 52.06 प्रतिशत रही. यानी राज्य सरकार 100 रूपये से अपने स्रोतों से 45-47.94 रुपये ही जुटा पा रही है. बाकी के लिए उसे केंद्र पर निर्भर रहना पड़ता है.
केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा के बदले BV-G-RAM-G लागू करने से राज्य पर आर्थिक दवाब पड़ रहा है. क्योंकि मनरेगा में कुल खर्च का 90% केंद्र सरकार और 10% राज्य सरकार खर्च करती थी. नये फंडिंग पैटर्न के तहत अब 60% केंद्र सरकार और 40%राज्य सरकार को खर्च करना है. इससे राज्य पर आर्थिक दबाव पड़ा है. वित्त विभाग ने फंडिंग पैटर्न में किये गये बदलाव से इस योजना पर सालाना 4000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ने का अनुमान किया.
केंद्र द्वारा GST और MMDR Act में किये गये संशोधन से राज्य की आमदनी कम होगी. GST रेट में किये गये संशोधन से सरकार ने इस मद में मिलने वाली राशि में अनुमान के मुकाबले 4000 करोड़ रुपये कम मिलने का अनुमान है.
इसके अलावा MMDR Act में संशोधन कर राज्य को खनिजों पर सेस लगाने का अधिकार समाप्त कर दिये जाने से इस मद में 14000 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान है. इससे राज्य के कुल आमदनी में अनुमान के मुकाबले कमी होगी और कुल आमदनी में उसकी हिस्सेदारी 47% से कम होने की उम्मीद है.
ऐसी स्थिति में राज्य को अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए केंद्र पर पहले के मुकाबले ज्यादा निर्भर होना पड़ेगा. अगर केंद्र ने अपनी हिस्सेदारी नहीं बढ़ायी तो राज्य की विकास योजनाएं प्रभावित होंगी.
कुल आमदनी में केंद्र और राज्य की हिस्सेदारी (करोड़ में)
| वित्तीय वर्ष | राज्य | केंद्र | कुल | राज्य | केंद्र |
| 2021-22 | 31320.36 | 38401.50 | 69721.86 | 45% | 55% |
| 2022-23 | 37947.56 | 42297.66 | 80245.22 | 47% | 53% |
| 3023-2024 | 41429.90 | 46498.61 | 87928.61 | 47% | 53% |
| 2024-25 | 42832.70 | 51755.92 | 94588.62 | 45.28% | 54.72 |
| 2025-26 | 52616.83 | 57135.46 | 109752.29 | 47.94% | 52.06% |
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